30 दिन से ज्यादा जेल में रहे मंत्री-सीएम तो छोड़ना होगा पद, JPC बैठक में बोले बृजमोहन अग्रवाल

Madhya Bharat Desk
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 रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025 और संघ राज्य क्षेत्र (संशोधन) विधेयक 2025 के अध्ययन के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के दिल्ली दौरे में हिस्सा लिया। इस दौरान दिल्ली सचिवालय में विभिन्न मंत्रालयों, विधि विशेषज्ञों और हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा हुई।

बैठक में समिति अध्यक्ष अपराजिता सारंगी सिंह समेत कई सांसद मौजूद रहे। चर्चा में प्रस्तावित विधेयकों के संवैधानिक, प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं पर मंथन किया गया। बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य राजनीति का अपराधीकरण रोकना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना और सुशासन को मजबूत करना है।

दिल्ली सरकार ने किया समर्थन

दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने समिति का स्वागत किया। बैठक के बाद बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली सरकार ने गृह मंत्रालय की मंशा और विधेयकों के उद्देश्यों का समर्थन किया है। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए कुछ व्यावहारिक सुझावों को समिति ने रिपोर्ट में शामिल करने का आश्वासन दिया।

30 दिन से अधिक न्यायिक हिरासत पर पद छोड़ना होगा

बृजमोहन अग्रवाल ने विधेयक के प्रमुख प्रावधान की जानकारी देते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री 30 दिनों से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे 31वें दिन अपना पद छोड़ना होगा। उन्होंने इसे राजनीति में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

कई संस्थानों और विशेषज्ञों से हुई चर्चा

JPC ने दिल्ली सरकार के अलावा National Human Rights Commission (NHRC), Guru Gobind Singh Indraprastha University, बार एसोसिएशनों, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया। समिति का कहना है कि अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले विभिन्न राज्यों और हितधारकों की राय को शामिल किया जाएगा।

समिति अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने बताया कि अब तक 11 बैठकों में विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जा चुकी है और जल्द ही रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपी जाएगी।

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