रायपुर: छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वर्ष 2025-26 के लिए फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने वर्तमान प्रक्रिया को अपारदर्शी बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने और नए सिरे से पारदर्शी शर्तें लागू करने की मांग की है.
स्थानीय मिलर्स को बाहर करने का आरोप
अमरजीत भगत ने पत्र में बताया कि मार्कफेड द्वारा 19 दिसंबर 2025 को जारी मूल RFP में राज्य के लगभग 90% एफआरके निर्माता पात्र थे. लेकिन मात्र एक सप्ताह के भीतर 26 दिसंबर 2025 को एक नया शुद्धिपत्र जारी कर दिया गया. आरोप है कि इस नए बदलाव के कारण अब राज्य के 80% स्थानीय प्लांट इस प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं और केवल 20% बड़े मिलर्स व बाहरी राज्यों के निर्माताओं को लाभ पहुँचाने की तैयारी की गई है.
राजस्व को 200 करोड़ की हानि की आशंका
पत्र में आर्थिक नुकसान का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि पिछले वर्ष एफआरके की दरें ₹39 से ₹49 प्रति किलो थीं. पात्रता की शर्तें कठिन होने से प्रतिस्पर्धा कम हो जाएगी, जिससे दरें ₹60 से ₹70 प्रति किलो तक पहुँच सकती हैं. इससे शासन पर ₹150 से ₹200 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा, जिसे सीधे तौर पर राजस्व की हानि बताया गया है.


नियमों में बड़े बदलाव का दावा
अब केवल NABCB मान्यता प्राप्त निकायों से प्रमाणित ISO 22000:2018 को ही मान्य किया जा रहा है .
टेंडर में अंकों (Marks) का नया क्राइटेरिया लाया गया है, जिसमें ₹10 करोड़ से ₹50 करोड़ तक के टर्नओवर और भारी नेट वर्थ की मांग की गई है. अनुभव: 2000 मीट्रिक टन से 5000 मीट्रिक टन से अधिक के सप्लाई अनुभव पर अंक निर्धारित किए गए हैं, जो नए उद्योगों के लिए भेदभावपूर्ण है.
PDS व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
पूर्व मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि आपूर्ति कुछ सीमित हाथों में केंद्रित हुई, तो भविष्य में एफआरके की कमी हो सकती है. इससे राइस मिलर्स समय पर चावल जमा नहीं कर पाएंगे, जिससे अंततः सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और गरीबों को मिलने वाले राशन की आपूर्ति बाधित हो सकती है.







