छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री के दावों के उलट जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग नजर आ रही है। खेतों में धान की फसल खड़ी है, लेकिन किसानों को न समय पर बीज मिला और ना ही अब यूरिया व डीएपी खाद मिल रही है। इसका नतीजा यह है कि अब किसानों का धैर्य जवाब देने लगा है और वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं।
खाद नहीं मिलने से किसानों का आक्रोश फुट पड़ा।
राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ ब्लॉक के ग्राम ढारा स्थित सेवा सहकारी समिति में बुधवार को किसानों का आक्रोश सड़कों तक पहुंच गया। यूरिया व डीएपी खाद की अनुपलब्धता से नाराज़ किसानों ने डोंगरगढ़-बैरागढ़ मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया और राज्य व केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का कहना था कि खाद की अत्यधिक आवश्यकता है, लेकिन सोसायटी के गोदामों में स्टॉक न होने की बात कहकर उन्हें लौटा दिया जाता है।
तीन घंटे तक रास्ता जाम, पुलिस को बुलाना पड़ा।
सैकड़ों की संख्या में आक्रोशित किसानों ने मेन रोड पर धरना देकर तीन घंटे तक रास्ता रोके रखा, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। हालात बिगड़ते देख मोहारा और डोंगरगढ़ से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा। मौके पर पहुंचे सहकारी केंद्रीय बैंक डोंगरगढ़ के ब्रांच मैनेजर योगेंद्र शर्मा ने किसानों से बातचीत कर एक दिन में एक ट्रक खाद उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद किसान शांत हुए।
स्टॉक बेहद कम, मांग ज्यादा।
शर्मा ने बताया कि ढारा सोसायटी में फिलहाल केवल 440 बोरी खाद उपलब्ध है, जो जरूरत के हिसाब से बेहद कम है। किसानों की मांग है कि पर्याप्त स्टॉक आने के बाद ही समान रूप से वितरण हो। गुरुवार को खाद का वितरण किए जाने की बात कही गई है।
कालाबाजारी की शिकायतें, महंगे दामों में बिक रहा खाद।
किसानों ने आरोप लगाया कि खाद की कालाबाजारी खुलेआम हो रही है। सोसायटी से खाद नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी दुकानों की ओर रुख करना पड़ रहा है, जहां 266 रुपए की बोरी 800 से 1000 रुपए तक बेची जा रही है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अंबागढ़ चौकी में भी प्रदर्शन, तहसील कार्यालय का घेराव।
इधर, अंबागढ़ चौकी ब्लॉक मुख्यालय में भी खाद संकट को लेकर किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। किसान संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर पूर्व विधायक छत्री साहू व नगर पंचायत अध्यक्ष अनिल मानिकपुरी के नेतृत्व में तहसील कार्यालय का घेराव कर विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शन में आठ सोसायटियों – बांधाबाजार, आमाटोला, चिल्हाटी, विचारपुर, छछानपाहरी, कौड़ीकसा, आतरगांव व अंबागढ़ चौकी के किसान शामिल हुए।
48 घंटे में खाद आपूर्ति की चेतावनी।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर सभी सोसायटियों में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक साहू, अनिल मानिकपुरी, जिला पंचायत सदस्य शेषवरी ध्रुवे सहित कई नेताओं ने किसानों को संबोधित किया।
सोसायटियों से गायब, निजी दुकानों में उपलब्ध!
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सोसायटी में खाद नहीं है लेकिन निजी दुकानों में भरपूर मात्रा में मिल रहा है। इससे सरकार की नीयत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि भाजपा सरकार पूंजीपतियों और व्यापारियों को खुला समर्थन दे रही है और किसानों की अनदेखी हो रही है।
प्रधानमंत्री का भाषण और जमीनी सच्चाई में फर्क।
गौरतलब है कि बुधवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाषण में कहा था कि भारत अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी सेक्टर के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहे हैं और उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है।
खाद संकट ने छत्तीसगढ़ के किसानों को आंदोलन की राह पर ला खड़ा किया है। जहां एक ओर सरकार किसानों के हितों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर खाद की अनुपलब्धता और कालाबाजारी से किसान त्रस्त हैं। यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसान आंदोलन और तेज हो सकता है।



