छत्तीसगढ़ सरकार ने वनवासी समुदाय और तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में बड़ा कदम उठाते हुए चरणपादुका योजना को पुनः लागू कर दिया है। वर्षों बाद योजना की वापसी से प्रदेश के वनांचल इलाकों में उत्साह और संतोष का माहौल देखने को मिल रहा है।
लंबे समय से बंद इस योजना के दोबारा शुरू होने से तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों, खासकर जंगलों में कठिन परिस्थितियों में काम करने वाली महिलाओं को बड़ी राहत मिली है। वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य के 12.40 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिला मुखियाओं को उच्च गुणवत्ता वाली चरणपादुकाएं वितरित की गई हैं। इस पूरी पहल पर राज्य सरकार ने लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
जंगलों में नुकीले पत्थरों, कांटों और कठिन रास्तों के बीच काम करने वाली महिलाओं के लिए ये चरणपादुकाएं सुरक्षा और सुविधा दोनों का काम कर रही हैं। लाभार्थियों का कहना है कि इससे उनके रोजमर्रा के काम में आसानी हुई है।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों को पहले से ही कई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण से होने वाली आय का 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे संग्राहकों को दिया जाता है। इसके अलावा बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति, स्वास्थ्य सहायता, दुर्घटना मृत्यु या स्थायी विकलांगता की स्थिति में बीमा कवर तथा विभिन्न वनोपजों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की सुविधा भी उपलब्ध है।
राज्य सरकार ने तेंदूपत्ता का पारिश्रमिक 5500 रुपये प्रति मानक बोरा तय किया है। साथ ही राजमोहिनी देवी योजना के तहत संग्राहकों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।
सरकार ने चरणपादुका योजना के विस्तार की घोषणा भी की है। वर्ष 2026 से पुरुष तेंदूपत्ता संग्राहकों को भी चरणपादुकाएं दी जाएंगी, जिसके लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है।
चरणपादुकाओं की खरीदी जेम पोर्टल के माध्यम से की गई है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही। वितरित की गई चरणपादुकाएं उच्च गुणवत्ता की हैं और उन पर एक साल की वारंटी भी दी गई है। इससे लाभार्थियों के बीच सरकार के प्रति भरोसा और संतोष साफ तौर पर नजर आ रहा है।







