शाला प्रवेशोत्सव से पहले सरकारी स्कूलों की बदहाली उजागर! 120 स्कूल अंधेरे में, 400 जुगाड़ की बिजली के सहारे

Madhya Bharat Desk
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कोरबा। नए शिक्षा सत्र और शाला प्रवेशोत्सव की तैयारियों के बीच कोरबा जिले के सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। एक ओर बच्चों के स्वागत और नामांकन बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले के 120 से अधिक सरकारी स्कूल आज भी बिजली जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। इसके अलावा 400 से ज्यादा स्कूल अस्थायी बिजली कनेक्शन के सहारे संचालित हो रहे हैं, जिससे पढ़ाई और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं।

गर्मी और उमस के इस मौसम में बिना बिजली के बच्चों को कक्षाओं में पढ़ाई करनी पड़ रही है। कई स्कूलों में पंखे नहीं चल रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।

शाला प्रवेशोत्सव का उद्देश्य हर बच्चे को स्कूल से जोड़ना है, लेकिन जिले में स्कूल छोड़ चुके बच्चों का स्पष्ट आंकड़ा अब तक उपलब्ध नहीं है। ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ने की प्रक्रिया भी अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कई बच्चे आज भी मजदूरी, घरेलू कामकाज और अन्य कारणों से शिक्षा से दूर हैं।

जिले में प्राथमिक स्तर के 1,526 स्कूल संचालित हैं, जिनमें से 521 स्कूलों के भवनों को मरम्मत की जरूरत है, जबकि 234 स्कूल अब भी टीन या खपरैल की छतों के नीचे संचालित हो रहे हैं। वहीं 513 मिडिल स्कूलों में से 156 भवन जर्जर स्थिति में हैं। जिले के 293 हाईस्कूलों में से 83 स्कूलों को भी मरम्मत की आवश्यकता है।

बिजली व्यवस्था की बात करें तो 120 से अधिक स्कूलों में आज तक बिजली कनेक्शन नहीं पहुंच पाया है, जबकि 400 से ज्यादा स्कूल अस्थायी कनेक्शन के सहारे चल रहे हैं। यह व्यवस्था न केवल बिजली आपूर्ति को प्रभावित करती है, बल्कि तकनीकी और सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बढ़ाती है।

टीन और खपरैल की छतों वाले स्कूलों में पढ़ाई करने वाले बच्चों को गर्मी और बरसात दोनों मौसमों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई भवनों की हालत इतनी खराब है कि वहां पढ़ने वाले बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

शाला प्रवेशोत्सव से पहले स्कूलों की इन मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होना शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि नए सत्र की शुरुआत से पहले प्रशासन और शिक्षा विभाग इन कमियों को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।

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