मोदी सरकार में फेरबदल: बृजमोहन दिल्ली दरबार, तो तोखन की ‘घर वापसी’

Madhya Bharat Desk
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मोदी कैबिनेट के आगामी संभावित फेरबदल और भाजपा के सांगठनिक पुनर्गठन को लेकर दिल्ली से रायपुर तक सियासी हलचल बेहद तेज हो गई है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय नेतृत्व ने एक बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत रायपुर के रिकॉर्डतोड़ सांसद बृजमोहन अग्रवाल को दिल्ली दरबार (केंद्रीय कैबिनेट) में कद्दावर भूमिका सौंपने और वर्तमान केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू की सांगठनिक मोर्चे पर ‘घर वापसी’ कराते हुए उन्हें छत्तीसगढ़ भाजपा की कमान (प्रदेश अध्यक्ष) सौंपने का पूरा मन बना लिया है। यह संभावित बदलाव केवल चेहरों की अदला-बदली नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति और सत्ता संतुलन को एक नई दिशा देने का बड़ा दांव है।

रायपुर लोकसभा सीट से 5.75 लाख से अधिक वोटों के ऐतिहासिक अंतर से जीतने वाले आठ बार के पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को केंद्र में शामिल करना छत्तीसगढ़ के चहुंमुखी विकास के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य गठन के बाद से अब तक चाहे चरणदास महंत रहे हों या रमेश बैस-कई चेहरे केंद्र में मंत्री तो बने, लेकिन दिल्ली से रायपुर को कोई बड़ा ‘प्रत्यक्ष लाभ’ नहीं मिल सका। लंबे समय बाद बृजमोहन अग्रवाल के रूप में सूबे को एक ऐसा अनुभवी चेहरा मिलने जा रहा है, जिसमें स्वर्गीय विद्याचरण शुक्ल जैसी प्रशासनिक कसावट, आक्रामकता और दिल्ली से अपने राज्य के लिए काम खींचने की गजब की ऊर्जा है, जिससे छत्तीसगढ़ के पेंडिंग पड़े नेशनल हाईवे और रेलवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स को रफ्तार मिलना तय है।

इस फेरबदल का दूसरा सबसे दिलचस्प और रणनीतिक पहलू वर्तमान केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू का वापस छत्तीसगढ़ लौटना और प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालना है। छत्तीसगढ़ की जनसांख्यिकी में ओबीसी और विशेषकर साहू समाज सबसे बड़ा और निर्णायक वोट बैंक है। अरुण साव के डिप्टी सीएम बनने के बाद, संगठन के मोर्चे पर तोखन साहू को आगे लाना पार्टी के इस पारंपरिक और सबसे मजबूत वोट बैंक को बिखरने से बचाने की अचूक ढाल है। एक गांव के पंच से लेकर केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय करने वाले तोखन साहू के पास जमीन की नब्ज का गहरा व्यावहारिक अनुभव है, जो आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में सांगठनिक रीढ़ को मजबूत करेगा।

संक्षेप में कहें तो, यह संभावित फेरबदल दरअसल ‘अनुभव और सामाजिक संतुलन’ का एक मुकम्मल कोलाज है जिसके जरिए भाजपा आलाकमान एक तीर से दो निशाने साध रहा है। एक तरफ जहां केंद्र में बृजमोहन अग्रवाल के रूप में एक आक्रामक और कद्दावर चेहरा मिलेगा जो छत्तीसगढ़ को उसका वास्तविक हक और फंड दिला सके, वहीं दूसरी तरफ तोखन साहू के रूप में राज्य को एक ऐसा जमीनी सेनापति मिलेगा जो कार्यकर्ताओं में नए सिरे से जोश फूंक सके। यदि यह समीकरण अमलीजामा पहनता है, तो यह छत्तीसगढ़ के विकास और भाजपा की अंदरूनी मजबूती, दोनों के लिए एक ‘विन-विन’ स्थिति होगी।

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