रायपुर: छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। हाल ही में दुर्ग जिले में दो नन समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी ने राज्य में चल रहे मानव तस्करी नेटवर्क की गंभीरता को उजागर किया है। यह चिंता का विषय है कि तस्करी का शिकार अधिकतर आदिवासी और पिछड़े वर्गों के लोग बन रहे हैं, जिन्हें बेहतर जीवन की आस में झांसे में लिया जाता है।
देश में टॉप मानव तस्करी प्रभावित राज्य
राष्ट्रीय स्तर पर मानव तस्करी के मामलों में पश्चिम बंगाल, राजस्थान, झारखंड, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे राज्य शीर्ष पर हैं। छत्तीसगढ़ में भी यह समस्या तेजी से पैर पसार रही है। वर्ष 2016 से 2018 तक के आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी के मामले कम नहीं हैं — 2016 में 68, 2017 में 48 और 2018 में 51 मामले दर्ज हुए।
छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी के हालिया आंकड़े
जनवरी 2023 से फरवरी 2025 तक राज्य में कुल 39 मानव तस्करी के प्रकरण सामने आए, जिनमें 66 पीड़ितों की पहचान हुई और 83 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
| वर्ष | प्रकरण | कुल पीड़ित | बरामद पीड़ित | गिरफ्तार आरोपी |
|---|---|---|---|---|
| 2023 | 22 | 46 | 45 | 47 |
| 2024 | 15 | 17 | 17 | 32 |
| 2025 | 02 | 03 | 03 | 04 |
| कुल | 39 | 66 | 65 | 83 |
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सक्रिय हैं तस्कर?
सरगुजा, जशपुर, कोरबा, बलरामपुर और बस्तर जैसे सीमावर्ती जिलों में मानव तस्करी के मामले ज्यादा सामने आते हैं। इन क्षेत्रों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति कमजोर होने के कारण लोग जल्दी बहकावे में आ जाते हैं। तस्करी के शिकार अधिकतर महिलाएं और नाबालिग लड़कियां होती हैं जिन्हें घरेलू नौकर, मजदूरी या यौन शोषण के लिए बाहर के राज्यों में भेजा जाता है।
63,000 से अधिक लोगों ने छोड़ा प्रदेश
जनवरी 2024 से फरवरी 2025 के बीच 63,000 से अधिक लोगों ने रोजगार की तलाश में राज्य से प्रवासन किया। बलौदाबाजार जिले से सबसे ज्यादा, लगभग 13,200 लोगों ने पलायन किया। इसके बाद जशपुर, कोरबा, मुंगेली, बिलासपुर, सक्ती, जांजगीर-चांपा और रायपुर जैसे जिले प्रमुख हैं।
कानून क्या कहता है?
भारतीय दंड संहिता (IPC) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मानव तस्करी गंभीर अपराध है। इसमें न्यूनतम 7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है, साथ ही जुर्माना भी लगाया जाता है।







