कबीरधाम जिले के पंडरिया जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत रैतापारा से प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। यहां के सरपंच और पंचों ने बढ़ते अवैध कब्जों और प्रशासन की अनदेखी से परेशान होकर सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है। इस घटना ने गांव में हलचल मचा दी है और स्थानीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी जमीनों पर लगातार कब्जे
गांव में सरकारी जमीन और स्कूल की जमीन पर लगातार अवैध कब्जे हो रहे हैं। आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद भी प्रशासन ने समय पर कार्रवाई नहीं की। इसी वजह से जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर को अपना सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया है।

जनप्रतिनिधियों का कहना है कि या तो उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाए या फिर तुरंत अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल
पंचायत का आरोप है कि तहसीलदार ने अतिक्रमण हटाने के आदेश तो जारी कर दिए, लेकिन जब कार्रवाई का समय आया तो पुलिस बल उपलब्ध नहीं कराया गया। इसी वजह से बेदखली की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई।
दो बड़े मामलों में कार्रवाई नहीं
पंचायत द्वारा दिए गए पत्र में दो प्रमुख मामलों का जिक्र है—
पहला मामला: खसरा नंबर 795/2 की सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्माण कार्य किया गया। 19 मई 2025 को शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और निर्माण पूरा हो गया।
दूसरा मामला: खसरा नंबर 536 (3 एकड़ जमीन) पर 16 फरवरी 2026 को कब्जा किया गया। इसके बाद पंचायत ने कई बार शिकायत की और नोटिस भी जारी हुए, यहां तक कि 8 अप्रैल 2026 को बेदखली का आदेश भी दिया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी।
हालात और बिगड़ते जा रहे हैं
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि कार्रवाई न होने से भू-माफियाओं के हौसले बढ़ गए हैं। अब गांव की अन्य सरकारी जमीनों और स्कूल की जमीनों पर भी कब्जे होने लगे हैं।
लगातार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम न उठाए जाने से सरपंच और पंच खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है।





