रायपुर। छत्तीसगढ़ में दूर-दराज के गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं, लेकिन अब राजधानी रायपुर में भी इमरजेंसी मेडिकल सेवा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शनिवार रात एक 20 वर्षीय युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों ने एंबुलेंस बुलाने के लिए डॉयल 108 और 112 पर लगातार संपर्क किया, लेकिन करीब आधे घंटे तक एंबुलेंस नहीं पहुंची। मजबूरी में युवक को मालवाहक वाहन से एम्स ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जान बचाने की कोशिश में मालवाहक का लिया सहारा
मृतक के रिश्तेदार लक्ष्मी नारायण ने बताया कि युवक की हालत लगातार बिगड़ रही थी। एंबुलेंस बुलाने के लिए उन्होंने कुल 11 बार फोन किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। पहले स्कूटी से अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन तेज दर्द के कारण युवक बैठ नहीं सका। इसके बाद मजबूरी में मालवाहक वाहन की व्यवस्था कर उसे एम्स रायपुर पहुंचाया गया। रविवार सुबह करीब 9:30 बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों के अनुसार युवक के फेफड़ों में गंभीर संक्रमण था।
हर साल 500 करोड़ से ज्यादा खर्च, फिर भी समय पर नहीं मिली मदद
प्रदेश में रायपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में डॉयल 112 के जरिए एंबुलेंस, पुलिस और फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी सेवाएं संचालित की जाती हैं। इन सेवाओं पर हर साल 500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद राजधानी में ही जरूरतमंद मरीज को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पाई। डॉयल 112 के तहत एंबुलेंस और पुलिस वाहनों के संचालन की जिम्मेदारी जीवीके को दी गई है।
अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका
इस मामले में समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचने को लेकर डॉयल 112 के एसपी गोपीचंद मेश्राम से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
रात 8 बजे से 8:30 बजे तक करते रहे कॉल
घटना रायपुर के बोरियाखुर्द इलाके की है। शनिवार रात करीब 8 बजे 20 वर्षीय प्रवीण कुमार की अचानक तबीयत बिगड़ गई। पूरे शरीर में तेज दर्द होने लगा। उनके रिश्तेदार लक्ष्मी नारायण नागरची ने सबसे पहले 108 नंबर पर कॉल किया, जहां से कॉल डॉयल 112 पर ट्रांसफर कर दिया गया। उन्होंने मरीज की गंभीर हालत बताते हुए तुरंत एंबुलेंस भेजने की मांग की। दूसरी ओर से एंबुलेंस भेजने का आश्वासन दिया गया, लेकिन करीब 10 मिनट तक कोई वाहन नहीं पहुंचा। इसके बाद उन्होंने बार-बार फोन किया। रात 8 बजे से 8:30 बजे के बीच कुल 11 बार कॉल करने के बावजूद एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची और परिवार को कोई मदद नहीं मिल सकी।






