छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या उपमुख्यमंत्री अरुण साव अपने ही विभागों पर नियंत्रण खो चुके हैं? उनके पास लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE), लोक निर्माण विभाग (PWD) और नगरीय निकाय जैसे अहम विभागों का प्रभार है, लेकिन इनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, काम पूरा होने के बावजूद ठेकेदारों का भुगतान अटका हुआ है, जिससे प्रदेश में विकास कार्य लगभग ठप पड़ गए हैं। कहा जा रहा है कि विभागों की कमान अब मंत्री के हाथ में नहीं, बल्कि कुछ चुनिंदा अधिकारियों के हाथ में है, जिन्हें राजनीतिक गलियारों में ‘लक्ष्मी अधिकारी’ कहा जा रहा है।
‘लक्ष्मी अधिकारी’ बनाम जनता का सेवक
विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि मंत्री अरुण साव आखिर इन अधिकारियों पर सख्ती क्यों नहीं दिखा पा रहे? क्या वे ‘लक्ष्मी पुत्रों’ की ढाल बनेंगे या जनता के बुनियादी मुद्दों को हल करने के लिए कदम उठाएंगे?
ठेकेदारों की नाराजगी गहराई
ठेकेदार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने आठ दिन पहले उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। इस अनदेखी से प्रदेश भर के ठेकेदारों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि भुगतान रुकने से मजदूरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है और विकास कार्य अधर में लटक गए हैं।
जल जीवन मिशन भी संकट में
स्थिति इतनी गंभीर है कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन (JJM) भी भ्रष्टाचार और अधिकारियों की मनमानी के कारण लगभग ठप हो गया है। जिलों को आवंटित राशि वापस ली जा रही है और भुगतान प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है।
छोटे ठेकेदारों का आरोप है कि भ्रष्ट अधिकारी जानबूझकर उनका भुगतान रोक रहे हैं, ताकि बाहर के बड़े ठेकेदारों को फायदा मिले। इसका सीधा असर 200–300 छोटे ठेकेदारों पर पड़ा है, जिनके पास काम जारी रखने के लिए पैसे नहीं बचे हैं।
मिशन का उद्देश्य खतरे में
जल जीवन मिशन का लक्ष्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है, लेकिन मौजूदा हालात में यह सपना अधूरा नजर आ रहा है। ठेकेदारों ने सरकार से भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई और भुगतान प्रणाली को सरल बनाने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि उपमुख्यमंत्री अरुण साव अफसरशाही पर नकेल कसेंगे या फिर खामोश रहेंगे। यह कदम न केवल सरकार की साख, बल्कि उनके राजनीतिक भविष्य को भी प्रभावित करेगा।



