रायपुर।राजधानी रायपुर से करीब 130 किलोमीटर दूर बालोद जिले के दुधली गांव में आयोजित राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी अब आयोजन से ज्यादा अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में है। कागजों में करोड़ों के खर्च के दावे किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आई। मैदान में फैली गंदगी, बंद पड़े नल, बदबूदार शौचालय और पानी के लिए भटकते रोवर-रेंजर व्यवस्थाओं की पोल खोलते दिखे।
बताया जा रहा है कि यह आयोजन करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है, लेकिन मौके पर मौजूद हालात देखकर इस बड़े खर्च का कोई असर नजर नहीं आया। जानकारी के अनुसार डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की राशि केवल शौचालय व्यवस्था पर खर्च की गई, फिर भी प्रतिभागियों को साफ-सफाई और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ा। खाली पानी टंकियां और गंदे टॉयलेट व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करते रहे। हालात कुछ ऐसे दिखे, मानो 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स की याद ताजा हो गई हो, जहां भारी खर्च के बावजूद व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में थीं।
शुरुआत से विवादों में रहा आयोजन
जंबूरी की तैयारियों को लेकर विवाद पहले ही शुरू हो चुका था। निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले टेंट-तंबू लगाए जाने के आरोपों पर रायपुर सांसद और पूर्व शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने आयोजन को स्थगित करने की मांग की थी। हालांकि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निर्णय के बाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
आरोप है कि टेंट-तंबू मद में करीब 5 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए, जिसमें लगभग 2 करोड़ रुपये सिर्फ टॉयलेट व्यवस्था के लिए बताए गए हैं। जानकारी के अनुसार 400 टॉयलेट के लिए प्रति यूनिट 22 हजार रुपये के हिसाब से करीब 88 लाख रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा एक वीवीआईपी टॉयलेट का किराया 40 हजार रुपये तय किया गया, जबकि 130 यूरिनल के लिए प्रति नग 32 हजार रुपये निर्धारित किए गए। शौचालय, मूत्रालय और स्नान की अस्थायी व्यवस्थाओं पर कुल खर्च 1.62 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।
टॉयलेट-टेंट घोटाले के आरोप
दुधली (मालीघोरी) में 9 जनवरी से शुरू हुई पांच दिवसीय जंबूरी अब राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव का केंद्र बन चुकी है। आरोप है कि 5 जनवरी को जेम पोर्टल से जारी वर्क ऑर्डर में 400 टॉयलेट और 2,000 टेंट के निर्माण का उल्लेख है, जबकि स्थल निरीक्षण में 100 से भी कम टॉयलेट और लगभग 800 टेंट ही नजर आए।
आरोपकर्ताओं का कहना है कि चूंकि यह अस्थायी निर्माण है, इसलिए कुछ दिनों बाद कोई भौतिक प्रमाण नहीं बचेगा और कागजों में पूरी संख्या दिखाकर करोड़ों रुपये का भुगतान कर लिया जाएगा। मांग की जा रही है कि मंत्री स्वयं एक स्वतंत्र जांच टीम बनाकर तत्काल भौतिक सत्यापन कराएं।
इसके साथ ही राज्य स्काउट्स एवं गाइड्स की नियमावली की अनदेखी, पदाधिकारियों को हटाने, मनमानी नियुक्तियों और फंड को संस्था के खाते के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के खाते में जमा कराने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं। 2015 से 2019 के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार का हवाला देते हुए पुरानी जांचों का भी उल्लेख किया जा रहा है। अब यह मांग तेज हो गई है कि आयुक्त सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें कि वास्तव में कितने टॉयलेट और टेंट लगाए गए हैं।
शिक्षा मंत्री का जवाब
आरोपों पर पलटवार करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि आयोजन समाप्त होने के बाद भारत स्काउट्स एंड गाइड्स द्वारा पूरा खर्च सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि वर्क ऑर्डर से लेकर भुगतान तक की सभी जानकारियां सामने लाई जाएंगी और फिलहाल किसी तरह का भुगतान नहीं किया गया है।
विपक्ष का हमला
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता द्वारा अपनी ही सरकार के मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाना इस बात का प्रमाण है कि सरकार के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है। बिना टेंडर प्रक्रिया के काम देना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है और यही भाजपा की अंदरूनी सच्चाई को उजागर करता है।







