रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जल्द ही पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू होने जा रही है और इसी के साथ प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत रायपुर को पहला पुलिस कमिश्नर मिलने वाला है। सूत्रों के मुताबिक कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और प्रशासनिक सुधारों में अब तक के रिकॉर्ड को देखते हुए रायपुर रेंज के आईजी और एसीबी–ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर अमरेश मिश्रा का नाम इस पद के नियुक्ति के लिए लगभग तय मानी जा रही है।
आईजी अमरेश मिश्रा ने रायपुर रेंज में अपने कार्यकाल के दौरान पुलिसिंग को सिर्फ कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे परिणाम आधारित और जवाबदेह बनाया। संगठित अपराध, गैंग गतिविधियों, ड्रग्स तस्करी और साइबर फ्रॉड के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई ने राजधानी और आसपास के जिलों में अपराध की प्रकृति को बदलकर रख दिया। ड्रग्स के बड़े नेटवर्क से लेकर मोहल्लों में सक्रिय छोटे पेडलर्स तक पर कार्रवाई हुई, वहीं म्यूल अकाउंट और ऑनलाइन सट्टे से जुड़े सैकड़ों आरोपियों को जेल भेजा गया।
नक्सल मोर्चे पर भी अमरेश मिश्रा की भूमिका निर्णायक रही है। गरियाबंद–धमतरी क्षेत्र, जिसे कभी नक्सलियों का ट्रांजिट रूट माना जाता था, आज लगभग नक्सल मुक्त होने की कगार पर है। शीर्ष कैडर के नक्सलियों के मारे जाने, दर्जनों के आत्मसमर्पण और भारी मात्रा में हथियारों की बरामदगी ने इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है।
एसीबी–ईओडब्ल्यू के डायरेक्टर के रूप में अमरेश मिश्रा ने भ्रष्टाचार के मामलों में भी स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई कार्रवाई का असर यह हुआ कि सिस्टम में डर भी पैदा हुआ और शिकायतों में कमी भी देखने को मिली। उनकी छवि एक ऐसे अधिकारी की बन चुकी है, जिनके रहते गलत काम करने से पहले लोग कई बार सोचते हैं।
पुलिस कमिश्नरी प्रणाली में त्वरित निर्णय, प्रिवेंटिव एक्शन और कानून-व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण बेहद अहम होता है। बस्तर जैसे संवेदनशील इलाकों में काम करने से लेकर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और शहरी पुलिसिंग तक का अमरेश मिश्रा का अनुभव उन्हें इस नई व्यवस्था के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा बनाता है। यदि यह नियुक्ति होती है, तो रायपुर को ऐसा पहला पुलिस कमिश्नर मिलेगा जिसकी पहचान पद से नहीं, बल्कि ठोस काम और भरोसेमंद नेतृत्व से बनी है।







