नई दिल्ली/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भवन के निर्माण कार्य के भुगतान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने सरकार को तीन महीने के भीतर बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि तय समय सीमा में भुगतान नहीं होने पर 12 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज भी देना पड़ सकता है।
दरअसल, मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की इमारत के निर्माण कार्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भुगतान संबंधी सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई थीं और हाईकोर्ट से आवश्यक मंजूरी भी मिल चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक भुगतान नहीं किया गया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि जब संबंधित प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और भुगतान को मंजूरी भी मिल गई है, तब राशि रोककर रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) और वित्त विभाग को निर्देश दिया कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार तीन माह के भीतर पूरा भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो बकाया राशि पर 12 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज लगाया जाएगा। अदालत ने आदेश की अवहेलना होने पर इसे गंभीरता से लेने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि निर्माण कार्य का अंतिम हिसाब-किताब पहले ही तय हो चुका है और भुगतान के लिए जरूरी क्लियरेंस प्रमाणपत्र भी प्राप्त हो चुका है। इसके बावजूद भुगतान लंबित रखा गया है। इस दलील को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है और भुगतान प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं।





