रायपुर।केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में रायपुर की विशेष अदालत में 25 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए विशेष अदालत ने मामले के आठ मुख्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। वहीं, बाकी 17 आरोपियों को पहले ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, इसलिए फिलहाल उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी।
सीबीआई ने जिन 25 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया है, उनमें रितेश यादव, राहुल वक्ते, सतीश चंद्राकर, चंद्रभूषण वर्मा, सुनील दम्मानी, भीम यादव, अमित अग्रवाल, अर्जुन यादव, नीतीश दीवान, किशन लाल शर्मा, सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, शुभम सोनी, अनिल उर्फ अतुल अग्रवाल, सहदेव सिंह यादव, भारत ज्योति, विश्वजीत राय, अतुल सिंह, असीम दास, विकास चपड़िया, रोहित गुलाटी, विकास आहूजा, धीरज आहूजा और अनिल दम्मानी शामिल हैं।
इन आठ आरोपियों के खिलाफ जारी हुआ गिरफ्तारी वारंट
चार्जशीट दाखिल करने के साथ ही सीबीआई ने अदालत से आठ आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। जिन आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी हुआ है, उनमें सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल, शुभम सोनी, अनिल उर्फ अतुल अग्रवाल, विकास चपड़िया, रोहित गुलाटी, विकास आहूजा और धीरज आहूजा शामिल हैं।
17 आरोपियों की जमानत बनी रहेगी
बचाव पक्ष के वकील शशांक मिश्रा ने बताया कि जब इस मामले की जांच राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) कर रही थी, तब 17 आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी। बाद में राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर जांच सीबीआई को सौंप दी। उन्होंने कहा कि जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को भी पक्षकार बनाया था। ऐसे में अब सीबीआई की चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी इन 17 आरोपियों की जमानत खत्म नहीं होगी। वे पहले की तरह जमानत का लाभ लेते रहेंगे और फिलहाल उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी।
असीम दास का मामला अलग
सीबीआई ने असीम दास को भी आरोपियों की सूची में शामिल किया है, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। ऐसे में उन्हें नई जमानत लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, वे तय तारीखों पर विशेष अदालत में पेश होंगे और मुचलके पर रिहा होते रहेंगे।
गौरतलब है कि असीम दास वही शख्स हैं, जिनकी कार से विधानसभा चुनाव से पहले कथित तौर पर करोड़ों रुपये नकद मिलने का दावा जांच एजेंसियों ने किया था। यह मामला महादेव ऐप केस की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक माना जाता है।






