कोंडागांव। प्रदेश के जल जीवन मिशन में अधिकारियों का भ्रष्टाचार चरम पर है। हजार करोड़ों की बजट खर्च किए जाने के बाद भी छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव का सुशासन आम जनता तक साफ पानी पहुंचाने में विफल रहा है।
शासन-प्रशासन ग्रामीण इलाकों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन आज भी कई गांवों में लोगों को पेयजल जैसी जरूरी सुविधा नहीं मिल पा रही है। मामला जिले के तुमड़ीवाल स्थित कोटमता पारा का है, जहां ग्रामीण वर्षों से झरिया का पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इलाके में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा दो हैंडपंप लगाए गए थे, लेकिन लंबे समय से दोनों हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं।
छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के लिए 2019 से लेकर अब तक केंद्र द्वारा 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जल जीवन मिशन के तहत छत्तीसगढ़ में खर्च की जा चुकी है बावजूद इसके कई गांवों में ग्रामीण पानी के लिए संघर्ष कर रहे है और गंदा पानी पीने को मजबूर है।

कोटमता पारा में आज तक जल जीवन की पाइपलाइन नहीं पहुंच पाई है। लोग आज भी प्राकृतिक जलस्त्रोतों पर निर्भर हैं। गड्डा खोदकर प्यास बुझाने को मजबूर है और सूखे हैंडपंपों के कारण झिरिया खोदकर गंदा पानी पी रहे है।
अब सवाल यही उठता है कि इतने बजट खर्च करने के बाद भी इन ग्रामीण इलाकों तक जल जीवन मिशन की योजना क्यों नहीं पहुंच पाई है? आरोप है कि भ्रष्ट अधिकारियों ने करोड़ों रुपये गबन किए हुए है, जल जीवन मिशन के नाम पर सिर्फ काम चलाऊ हैंडपंप बनवाए गए है जबकि इस भीषण गर्मी में ऐसे इलाकों में पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है।





