चुनावी वादों में चमकता दलपत सागर, हकीकत में जलकुंभी से ढका

Madhya Bharat Desk
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जगदलपुर का दिल कहे जाने वाला दलपत सागर आज अपनी पहचान के लिए जूझ रहा है। कभी साफ और शांत जल के लिए मशहूर यह झील अब जलकुंभी की मोटी परत में दब चुका है।

दलपत सागर छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में स्थित एक ऐतिहासिक और सबसे बड़ी कृत्रिम झील है। 400 साल से अधिक पुरानी यह झील राजा दलपत देव काकतीय द्वारा वर्षा जल संचयन के लिए बनवाई गई थी। लगभग 350-385 हेक्टेयर में फैली यह झील बोटिंग, पिकनिक और मनोरम सूर्यास्त दृश्यों के लिए एक प्रमुख पर्यटन स्थल है।

पर वर्तमान समय में दलपत सागर अपनी हालत पर खुद रो रहा है। यहां रह रहे लोग बताते है कि हर चुनाव में दलपत सागर की सफाई एक बड़ा मुद्दा बनता है। राजनीतिक दल घोषणा पत्रों में बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही ये वादे भी पानी में ही बह जाते हैं।

स्थिति यह है कि साल-दर-साल जलकुंभी हटाने के नाम पर बजट तो बढ़ता जा रहा है, लेकिन जमीन पर बदलाव नजर नहीं आता और यही हालत हर बार रहती है।

अगर बस्तर जैसे क्षेत्र में नक्सल समस्या को काबू में लाया जा सकता है, तो क्या दलपत सागर से जलकुंभी हटाना इतना मुश्किल है?

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