छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) की कोयला खदान परियोजना के विरोध में चल रहा आंदोलन शनिवार को हिंसक हो गया। धरना स्थल खाली कराने पहुंची पुलिस पर उग्र ग्रामीणों ने हमला कर दिया। इस दौरान तमनार थाना प्रभारी कमला पुषाम पर महिलाओं ने लात-घूंसे बरसाए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं।
घटना में SDOP अनिल विश्वकर्मा सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। कुछ घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि गंभीर रूप से घायलों को रायगढ़ जिला अस्पताल रेफर किया गया है। हालात इतने बिगड़ गए कि उग्र भीड़ ने पुलिस की गाड़ियों और एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया।

कैसे भड़की हिंसा
रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि बीते 15 दिनों से प्रभावित गांवों के लोग शांतिपूर्ण ढंग से धरने पर बैठे थे। शनिवार दोपहर करीब ढाई बजे अचानक कुछ असामाजिक तत्वों ने भीड़ को भड़का दिया, जिसके बाद पथराव शुरू हो गया। पुलिसकर्मियों को जान बचाकर पीछे हटना पड़ा।
प्रशासन और पुलिस ने दोबारा बातचीत के लिए प्रयास किया, लेकिन भीड़ उग्र बनी रही और फिर से पथराव शुरू कर दिया गया।

1000 तक पहुंची भीड़, बैरिकेड तोड़े
दरअसल, यह पूरा मामला 8 दिसंबर 2025 को धौराभाठा में हुई जनसुनवाई के विरोध से जुड़ा है। JPL कोयला खदान सेक्टर-1 से प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीण 12 दिसंबर से आंदोलन कर रहे हैं। शनिवार सुबह करीब 300 ग्रामीण लिबरा चौक पर सड़क पर बैठ गए, जिससे यातायात बाधित हो गया।
स्थिति संभालने के लिए SDM, SDOP और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे। शुरुआती बातचीत के बाद हालात कुछ देर शांत रहे, लेकिन दोपहर तक आसपास के गांवों से और लोग पहुंच गए। भीड़ की संख्या करीब 1000 के आसपास हो गई।
करीब ढाई बजे भीड़ ने बैरिकेड तोड़ दिए और पुलिस पर पत्थरों व डंडों से हमला कर दिया। कई पुलिसकर्मी और महिला आरक्षक घायल हो गए।

जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट में आगजनी
उग्र भीड़ ने मौके पर खड़ी पुलिस बस, जीप और एंबुलेंस को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट में घुस गए, जहां कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में आग लगा दी गई। प्लांट के दफ्तर में भी जमकर तोड़फोड़ की गई।
अधिकारियों की मौजूदगी में भी नहीं रुकी हिंसा
स्थिति पर काबू पाने के लिए लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार, रायगढ़ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक खुद मौके पर पहुंचे, लेकिन उनके सामने भी पथराव और आगजनी की घटनाएं जारी रहीं।
फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासन का दावा है कि हालात नियंत्रण में हैं। उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी है।
सरगुजा के बाद अब रायगढ़ में कोयला खदान के विरोध में इस तरह की हिंसा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—आखिर इस पूरे घटनाक्रम के पीछे साजिश किसकी है?



