आयुष्मान योजना पर विधानसभा में गरमाया माहौल, एक हफ्ते में समीक्षा का भरोसा

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन को लेकर जोरदार चर्चा देखने को मिली। आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद पात्र लोगों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिलने और बड़े निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल को सत्ता और विपक्ष दोनों तरफ से सवालों का सामना करना पड़ा।

विपक्ष की विधायक कविता प्राण लहरे ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से इस विषय को उठाया। उन्होंने कहा कि कई निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को सही तरीके से इलाज नहीं मिल रहा है। इसके अलावा गंभीर बीमारियों के उपचार में भी योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक भी मुखर नजर आए। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, धर्मजीत सिंह और अमर अग्रवाल ने इसे जनहित से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय बताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजना है, इसलिए इसके क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार स्पष्ट घोषणा कर योजना का लाभ सभी पात्र कार्डधारियों तक सुनिश्चित करे।

विधानसभा की आसंदी ने भी इस विषय को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री को जल्द निर्णय लेने का निर्देश दिया।

हालांकि स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा कि इस विषय में सीधे घोषणा करना संभव नहीं है, क्योंकि इसके लिए निर्धारित नियम और प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। मंत्री के इस जवाब पर विधायक अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि निजी अस्पतालों से संबंधित कोई निर्णय लेना है तो उसके नियमों को सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए।

इस दौरान अन्य विधायकों ने भी अपनी चिंता जताई। विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन को लेकर वे सात बार स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं आशाराम नेताम ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

सदन की आसंदी ने कहा कि इस विषय पर सत्ता और विपक्ष दोनों के विधायक चिंतित हैं और सभी चाहते हैं कि योजना का बेहतर क्रियान्वयन हो।

अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि सभी सदस्यों ने महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। विभागीय स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी और अगले एक सप्ताह के भीतर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि अधिक से अधिक अस्पतालों में आयुष्मान योजना का लाभ मिल सके।

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