रायगढ़ (छत्तीसगढ़)। औद्योगिक गतिविधियों और खनन के लिए चर्चित रायगढ़ जिले से एक बार फिर हाथी के शावक की मौत की खबर सामने आई है। जिले के तमणार वन परिक्षेत्र के झिंगोल बीट, कक्ष क्रमांक 838 आरएफ में शनिवार दोपहर करीब दो माह के एक हाथी के बच्चे का शव जंगल में मिला। पिछले एक वर्ष में केवल रायगढ़ जिले में हाथियों के 9 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिससे वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने सबसे पहले जंगल में शावक का शव देखा और इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही तमणार एसडीओ आयुष मंझवा, रेंजर विक्रांत कुमार और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
घटनास्थल पर बड़े हाथियों के पैरों के गहरे निशान पाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, निशानों से अनुमान लगाया जा रहा है कि शावक की मौत के बाद झुंड के बड़े हाथियों ने उसे उठाने या खींचने की कोशिश की होगी।
वन विभाग ने मौके पर किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या करंट वाले तार के प्रमाण नहीं मिलने की बात कही है। पंचनामा कार्रवाई के बाद रविवार को शावक का पोस्टमार्टम कराया गया।
डॉक्टरों की प्रारंभिक जांच में शरीर में कमजोरी के लक्षण पाए गए हैं, जबकि बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
गौरतलब है कि रायगढ़ जिला लंबे समय से अंधाधुंध खनन और औद्योगिक विस्तार को लेकर चर्चा में रहा है। लगातार हो रही हाथियों की मौतों ने पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन की रणनीतियों पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।
स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि हाथियों के प्राकृतिक आवास और आवागमन मार्गों पर बढ़ते दबाव का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।







