छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में दाखिल की गई एक याचिका पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। वासु चक्रवर्ती द्वारा दायर इस याचिका की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश रेशि सिन्हा ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि याचिकाकर्ता को यह साबित करना होगा कि उन्होंने वास्तव में समाज और जनता के हित में कोई काम किया है।
अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से शपथ-पत्र सहित उन कार्यों की सूची मांगी है, जिनसे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता केवल राजनीतिक कारणों से नहीं, बल्कि जनहित में सक्रिय हैं। न्यायालय ने कहा कि अदालत के समय का दुरुपयोग राजनीतिक मकसद से नहीं होना चाहिए, बल्कि वास्तविक सामाजिक कार्यों पर होना चाहिए।
याचिकाकर्ता की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए अदालत ने यह भी पूछा कि अब तक उन्होंने समाज के लिए कौन-कौन से ठोस कार्य किए हैं। जब वकील किशोर भादुड़ी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया, तो चीफ जस्टिस ने निर्देश दिया कि पहले एफ़िडेविट फाइल किया जाए।
इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी। उससे पहले याचिकाकर्ता को अतिरिक्त शपथ-पत्र दाखिल करना होगा, जिसमें उनके अब तक किए गए कार्यों का विवरण विस्तार से प्रस्तुत किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि केवल राजनीतिक उद्देश्य से दायर याचिकाओं पर न्यायालय का समय बर्बाद नहीं होना चाहिए।
इस सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से किशोर भादुड़ी और अभ्युदय सिंह ने पैरवी की। यह मामला आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि यह तय करेगा कि वास्तव में जनहित याचिकाओं का दायरा और वैधता किन आधारों पर परखी जाएगी।



