छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित शराब घोटाला लंबे समय से सुर्खियों में बना हुआ है। इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने आबकारी विभाग के कई अधिकारियों को आरोपी बनाया था। आरोपियों में 6 पूर्व आबकारी अधिकारी भी शामिल हैं। कुल 28 अधिकारियों ने अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी 28 अधिकारियों को शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों को जांच में सहयोग करना होगा। कोर्ट ने सरकार को भी नोटिस जारी किया है और 10 अक्टूबर तक जवाब मांगा है।
जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने मामले की सुनवाई की और दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। सभी अधिकारियों को 23 सितंबर को स्पेशल कोर्ट में उपस्थित होना होगा।
EOW ने इस शराब घोटाले की राशि लगभग 32 सौ करोड़ रुपए बताई है। EOW ने आरोप लगाया है कि आबकारी विभाग के अफसरों ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया, लेकिन गिरफ्तारी के बजाय उनके खिलाफ चालान पेश किया गया। कुल मिलाकर 29 अधिकारियों पर आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
इस पूरे मामले ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों को हिलाकर रख दिया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत से फिलहाल अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन अंतिम फैसला आने में अभी समय लगेगा।



