बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में इस बार मानसून ने 94 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। तीन दिनों तक लगातार हुई मूसलधार बारिश ने पूरे क्षेत्र को जलप्रलय में बदल दिया। नतीजा यह हुआ कि सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए, घर ढह गए और लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। किसानों के ट्रैक्टर, बोर पंप, मवेशी, अनाज, शादी का सामान और जरूरी दस्तावेज तक बह गए। लोगों का कहना है कि ऐसी आपदा उन्होंने पहले कभी नहीं देखी।
मुख्यमंत्री विदेश में रहते हुए कर रहे निगरानी
जब बस्तर बाढ़ की चपेट में था, उस समय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय दक्षिण कोरिया दौरे पर थे। इसके बावजूद वे लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हालात की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के कलेक्टरों व अधिकारियों को राहत कार्य तेज करने, हर प्रभावित परिवार तक मदद पहुँचाने और मुआवजा प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
बाढ़ से तबाही की तस्वीरें
- दंतेवाड़ा जिले में खेतों में खड़े ट्रैक्टर और बोर पंप बह गए।
- बस्तर जिले में घरों की दीवारें गिर गईं, दरवाजे-खिड़कियां तक पानी में बह गए।
- दुकानों में घुसे पानी ने राशन खराब कर दिया, लोग कीचड़ निकालते दिखे।
- कई घरों में शादी का सामान और खाद्य सामग्री पूरी तरह बर्बाद हो गई।
पीड़ितों का दर्द और संघर्ष
प्रभावित परिवारों ने बताया कि लगातार तीन दिन तक चूल्हा तक नहीं जला। जरूरी दस्तावेज, राशन, कपड़े और मवेशी सब कुछ बह गया। मांदर गांव के लोगों ने कहा कि उनके पास अब न तो भोजन बचा है और न ही रहने की जगह। यहां तक कि आधार कार्ड और राशन कार्ड तक नष्ट हो गए हैं।
प्रशासन की चुनौती और राहत अभियान
प्रशासन ने SDRF की टीमों को नावों के साथ राहत कार्य में लगाया है। एनएच-30 सहित कई सड़कें पानी में डूबने से बंद हो गईं। फंसे हुए लोगों को नाव से सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में ले जाया जा रहा है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में पीने के पानी और भोजन की भारी कमी देखने को मिली।
पानी की असमान आपूर्ति पर विवाद
इस बीच, स्थानीय लोगों का आक्रोश तब बढ़ गया जब यह खबर सामने आई कि आम लोग पीने के पानी के लिए जूझ रहे थे, लेकिन नगर पालिका CMO के घर सरकारी टैंकर से सफाई के लिए पानी पहुँचाया गया।
बस्तर की एकजुटता ने दिखाई मिसाल
हालांकि मुश्किल घड़ी में सबसे पहले गांव के लोग और रिश्तेदार ही मदद को आगे आए। पड़ोसी खुद राशन और जरूरी सामान लेकर पहुंचे। प्रशासन की देरी के बावजूद समाज की एकजुटता ने संकट की घड़ी में बड़ी ताकत दिखाई।
मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विदेश से ही लगातार प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने हर अधिकारी को राहत शिविरों में मौजूदगी सुनिश्चित करने और पीड़ितों को हरसंभव मदद पहुंचाने का निर्देश दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन और समाज की संयुक्त कोशिशों से बस्तर इस भयंकर बाढ़ के संकट से जल्द ही उबर जाएगा।







