“पुल अधूरा, रास्ता बंद” — NH-130 पर स्कूल ड्रेस में बच्चों और महिलाओं का बड़ा चक्काजाम

Madhya Bharat Desk
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गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक के अमाड़ पंचायत में एक अधूरा पुल अब लोगों की परेशानी और गुस्से की बड़ी वजह बन गया है। मंगलवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे-130 पर उतरकर चक्काजाम कर दिया। इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें महिलाएं ही नहीं, बल्कि स्कूल यूनिफॉर्म में बच्चे भी हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर बैठे नजर आए।

ग्रामीणों का दर्द साफ झलक रहा था वे कह रहे हैं कि “पुल बनाओ या कम से कम रास्ता चलने लायक छोड़ो।” दरअसल, पुल निर्माण के नाम पर पहले से मौजूद रपटे को तोड़ दिया गया, लेकिन नया पुल अब तक पूरा नहीं हो सका। ऐसे में गांव के लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता आने वाले मानसून की है। उनका कहना है कि हल्की बारिश में ही कच्चा अस्थायी रास्ता बह सकता है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, गर्भवती महिलाओं और मरीजों के लिए हालात और गंभीर हो जाएंगे।

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उन्होंने 30 मार्च को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्या रखी थी और 15 दिन पहले ही चक्काजाम की चेतावनी भी दे दी थी। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम और लोकेश्वरी नेताम ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्र की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन और तेज होगा।

दरअसल, इस पुल के निर्माण के लिए 2024 में करीब 1.49 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी। पीएमजीएसवाई विभाग को इसकी जिम्मेदारी दी गई और एक निजी ठेकेदार कंपनी ने फरवरी में काम शुरू भी कर दिया था। लेकिन वन क्षेत्र से जुड़े एनओसी के मुद्दे के चलते उदंती अभ्यारण्य प्रशासन ने काम रुकवा दिया।

अब हालात ये हैं कि नाले पर सिर्फ मिट्टी और रेत से बना अस्थायी रास्ता है, जो किसी भी वक्त बह सकता है। प्रशासनिक तालमेल की कमी का खामियाजा सीधे तौर पर ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।

ग्रामीणों की मांग साफ है जब तक पुल नहीं बनता, तब तक कम से कम रास्ता सुरक्षित और चालू रखा जाए, ताकि उनकी जिंदगी सामान्य रह सके।

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