तेल का खेल: ‘ड्रिल, बेबी, ड्रिल’
डोनाल्ड ट्रंप का साफ संकेत है कि वे अमेरिका को दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा उत्पादक बनाए रखना चाहते हैं। उनकी रणनीति के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- सस्ता उत्पादन: पर्यावरणीय नियमों को किनारे रखकर कच्चे तेल और गैस के उत्पादन को बढ़ावा देना।
- ऊर्जा में दबदबा: ट्रंप का मानना है कि यदि अमेरिका के पास भरपूर और सस्ता तेल होगा, तो वह चीन और यूरोप को मैन्युफैक्चरिंग की दौड़ में पीछे छोड़ सकता है।
- महंगाई पर प्रहार: वे तेल की कीमतें कम कर घरेलू स्तर पर महंगाई को नियंत्रित करने की कोशिश में हैं, जिससे अमेरिकी जनता की क्रय शक्ति बढ़े।
ट्रेडिंग की बिसात: टैरिफ बनेगा हथियार
ट्रंप के लिए ‘ट्रेडिंग’ सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि एक तरह का ‘आर्थिक युद्ध’ है। वे व्यापार घाटे को कम करने के लिए सख्त कदम उठाने के पक्ष में हैं:
- टैरिफ का जाल: चीन से आने वाले सामान पर 60% तक और अन्य देशों पर 10-20% तक का यूनिवर्सल टैरिफ लगाने की योजना।
- नेगोशिएशन का तरीका: वे टैरिफ को एक ‘बार्गेनिंग टूल’ की तरह इस्तेमाल करेंगे, ताकि दूसरे देश अमेरिकी शर्तों पर व्यापार करने को मजबूर हों।
- डॉलर की ताकत: ट्रंप की कोशिश होगी कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर का वर्चस्व बना रहे, जिससे ट्रेडिंग की हर कड़ी अमेरिका के प्रभाव में रहे।
ट्रंप प्रशासन के लिए अर्थव्यवस्था कोई जटिल गणित नहीं, बल्कि एक सीधा ‘डील’ है। वे तेल को ताकत के रूप में और टैरिफ को नियंत्रण के साधन के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं।



