छत्तीसगढ़ बजट : धर्म स्वातंत्र्य विधेयक समेत 3 बड़े बिल पेश, क्या बदलेगा राज्य की राजनीति का समीकरण?

Madhya Bharat Desk
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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने जा रहा है और 20 मार्च 2026 तक चलेगा। कुल 15 बैठकों वाले इस सत्र को छत्तीसगढ़ विधानसभा का सबसे अहम सत्र माना जा रहा है। वजह साफ है — सरकार तीन बड़े विधेयक लाने जा रही है, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 है।

 साय सरकार के लिए बड़ी परीक्षा

यह सत्र विष्णु देव साय सरकार के लिए एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। विपक्ष पहले से हमलावर मुद्रा में है और 2,813 प्रश्नों की सूचनाएं विधानसभा सचिवालय को मिल चुकी हैं, जिनमें 1,437 तारांकित प्रश्न शामिल हैं। साफ है कि सदन में तीखी बहस देखने को मिलेगी।

सत्र के पहले दिन राज्यपाल रमेन डेका का अभिभाषण होगा, जिसमें सरकार अपनी उपलब्धियों और भविष्य की रूपरेखा पेश करेगी।

 धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026: क्या हैं मुख्य प्रावधान?

सरकार 1968 के पुराने कानून को बदलकर नया धर्म स्वातंत्र्य विधेयक ला रही है। प्रस्तावित बिल में जबरन, धोखाधड़ी या लालच देकर किए गए धर्म परिवर्तन पर कठोर सजा का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल हो सकती है।

सरकार का दावा है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए है। इसे तैयार करने से पहले ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित नौ राज्यों के कानूनों का अध्ययन किया गया है।

हालांकि विपक्ष इसे लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की अध्यक्षता में कांग्रेस ने रणनीति बैठक भी बुलाई है।

 24 फरवरी को पेश होगा तीसरा बजट

24 फरवरी को दोपहर 12:30 बजे वित्त मंत्री ओपी चौधरी बजट पेश करेंगे। यह साय सरकार का तीसरा बजट होगा, जिसे “विजन 2047” की दिशा में पहला ठोस कदम बताया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, बजट में महिलाओं के सशक्तिकरण, युवाओं के रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने पर खास फोकस रहेगा।

विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने बताया कि सत्र में 61 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और 112 याचिकाओं पर भी चर्चा होगी।

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 लखमा को सशर्त राहत

पूर्व मंत्री कवासी लखमा को शराब घोटाले में जमानत मिलने के बाद सदन में आने की अनुमति दी गई है। हालांकि उन्हें अपने मामले पर बोलने की इजाजत नहीं होगी और सक्रिय मोबाइल नंबर जमा कराना होगा।

 दो और अहम विधेयक

धर्म स्वातंत्र्य बिल के अलावा सरकार:

  • छत्तीसगढ़ लोक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन विधेयक
  • अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक

भी पेश करेगी। इनका उद्देश्य कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन को मजबूत करना बताया जा रहा है।

 बजट सत्र का संभावित शेड्यूल

  • 23 फरवरी – राज्यपाल का अभिभाषण
  • 25 फरवरी – कृतज्ञता ज्ञापन पर चर्चा
  • 26-27 फरवरी – आय-व्यय पर सामान्य चर्चा
  • 9 से 17 मार्च – विभागवार अनुदान मांगों पर विचार

 क्या होगा असर?

यह बजट सत्र सिर्फ आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं होगा, बल्कि 2026 की राजनीति की दिशा भी तय कर सकता है। धर्म स्वातंत्र्य विधेयक सामाजिक बहस को तेज करेगा, जबकि बजट आर्थिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करेगा।

राज्य की जीडीपी वृद्धि 5-7% तक पहुंचाने का लक्ष्य भी चर्चा में है। विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने को तैयार है, ऐसे में सदन का माहौल गरम रहना तय है।

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