रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे रायपुर–विशाखापत्तनम कॉरिडोर से जुड़ा भू-अधिग्रहण अब एक बड़े घोटाले का रूप ले चुका है। मुआवज़ा वितरण में लगभग 500 करोड़ रुपये तक की अनियमितताओं की बात सामने आने के बाद जांच का दायरा 11 जिलों तक फैल चुका है।
मामला केवल राजस्व गड़बड़ी का नहीं, बल्कि सरकारी खजाने को व्यवस्थित तरीके से नुकसान पहुंचाने का है। हैरानी की बात यह है कि कई राज्य स्तरीय अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन अब तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से जुड़े अधिकारियों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
यह स्थिति तब है जब हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि राज्य एजेंसियां केंद्रीय अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं।
फरार हैं तत्कालीन एसडीएम
इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन एसडीएम निर्भय कुमार साहू का नाम मुख्य आरोपियों में सामने आया है। वे फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। वहीं नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण और तहसीलदार शशिकांत कुर्रे समेत कई पटवारी और जमीन दलालों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सूत्रों के अनुसार, 25 से अधिक प्रशासनिक अधिकारी और बिचौलिए जांच के घेरे में हैं और जल्द ही और गिरफ्तारियां संभव हैं।
11 जिलों में फैला नेटवर्क
इस कथित घोटाले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) संयुक्त रूप से कर रहे हैं। रायपुर, धमतरी, कांकेर, कोरबा, दुर्ग, बिलासपुर, जशपुर और राजनांदगांव सहित 11 जिलों में दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। अब तक 500 से अधिक खसरे जांच के दायरे में लाए जा चुके हैं और करीब 2000 पन्नों के दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
बटांकन के नाम पर खेल
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि राजस्व अधिकारियों ने कुछ जमीन दलालों के साथ मिलकर एक ही खसरे की जमीन को कागजों में कई छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में 500 वर्गमीटर से कम भूमि पर अधिक मुआवज़ा दर लागू होती है। इसी प्रावधान का लाभ उठाते हुए बड़ी जमीन को छोटे टुकड़ों में दिखाकर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त मुआवज़ा निकाला गया।
उदाहरण के तौर पर, जिस एक एकड़ जमीन का वास्तविक मुआवज़ा लगभग 20 लाख रुपये होना चाहिए था, उसे कागजी हेरफेर के जरिए कई गुना बढ़ाकर करोड़ों में पहुंचा दिया गया।
संपत्ति कुर्की की तैयारी
जांच एजेंसियां अब भ्रष्टाचार से अर्जित चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में हैं। सूत्रों का कहना है कि कई आरोपियों की संपत्ति की सूची तैयार की जा रही है।
बड़ा सवाल
यह मामला केवल धन के दुरुपयोग का नहीं, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। अब सबसे अहम सवाल यही है — क्या जांच केंद्रीय स्तर तक पहुंचेगी? क्या एनएचएआई से जुड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी, या जिम्मेदारी केवल राज्य अधिकारियों तक सीमित रह जाएगी?छत्तीसगढ़ की जनता अब जवाब चाहती है।






