अडानी लैंको के विस्तार को लेकर कोरबा में विरोध तेज

Madhya Bharat Desk
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कोरबा।छत्तीसगढ़ के औद्योगिक नगर कोरबा में एक बार फिर उद्योग और पर्यावरण के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। भारतीय युवा कांग्रेस (कोरबा शहर इकाई) ने लैंको अमरकंटक पावर लिमिटेड की प्रस्तावित यूनिट 5 और 6 को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संगठन ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए 27 फरवरी 2026 को ग्राम सरगबुंदिया में प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई को तत्काल रद्द या स्थगित करने की मांग की है।

युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष राकेश पंकज का कहना है कि वर्ष 2011 में परियोजना के लिए आसपास के गांवों की लगभग 1700 पट्टा भूमि का अधिग्रहण किया गया था। उस समय प्रभावित परिवारों को रोजगार और पुनर्वास का भरोसा दिया गया था, लेकिन आज तक अधिकतर परिवारों को स्थायी रोजगार नहीं मिल सका है। संगठन का आरोप है कि यह स्थिति भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम 2013 की मूल भावना के विपरीत है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई किसानों को बाजार दर के अनुरूप पारदर्शी मुआवजा नहीं मिला। पुनर्वास और पुनर्स्थापन की व्यवस्थाएं अधूरी रहीं। वहीं हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों के लिए ‘राइट ऑफ वे’ के तहत प्रभावित जमीन मालिकों को भी समुचित मुआवजा न मिलने की शिकायत की गई है।

संगठन ने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 135 के तहत स्थानीय विकास के लिए निर्धारित CSR फंड का सही उपयोग नहीं होने का आरोप लगाया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि सड़क, नाली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे मूलभूत क्षेत्रों में अपेक्षित काम नजर नहीं आते।

पर्यावरणीय पहलुओं को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। संगठन का दावा है कि पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने से पहले ही निर्माण कार्य शुरू कर दिए गए। राखड़ (फ्लाई ऐश) के खुले परिवहन और अवैध डंपिंग से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों को हसदेव नदी के कथित रूप से प्रदूषित पानी के उपयोग के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐश पांड प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण मानकों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।

युवा कांग्रेस ने मांग रखी है कि वर्ष 2011 से प्रभावित सभी 1700 परिवारों को स्थायी रोजगार देने की स्पष्ट और समयबद्ध योजना सार्वजनिक की जाए। साथ ही लंबित मुआवजा और पुनर्वास मामलों की स्वतंत्र जांच, CSR फंड के उपयोग का सोशल ऑडिट और यूनिट 5-6 के निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जाए।

संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक पूर्व शर्तों का पारदर्शी और न्यायपूर्ण पालन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक नई परियोजना को आगे बढ़ाना जनहित और कानून—दोनों के खिलाफ माना जाएगा। ज्ञापन की प्रतिलिपि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), श्रम विभाग, जिला कलेक्टर और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई है।

कोरबा में अब यह मुद्दा सिर्फ एक औद्योगिक विस्तार का नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार, पर्यावरण सुरक्षा और ग्रामीणों के अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील प्रश्न बन चुका है।

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