नई दिल्ली। बांग्लादेश को भारत सरकार द्वारा दी गई 60 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर सांसद सुलता देव ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे “करदाताओं के पैसे का गलत इस्तेमाल” बताया है।
सांसद ने कहा कि जब बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और भारतीय मूल के श्रमिकों के साथ हिंसा और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती हैं, तब ऐसे समय में आर्थिक सहायता देना समझ से परे है। उन्होंने भावुक अंदाज़ में कहा, “ये हमारे देश के लोगों की गाढ़ी कमाई का पैसा है। अगर हमारे नागरिक वहां सुरक्षित नहीं हैं तो फिर हम किस आधार पर इतनी बड़ी रकम दे रहे हैं?”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विदेशी संबंधों में संवेदनशीलता दिखा रही है, लेकिन घरेलू मुद्दों—खासतौर पर किसानों और श्रमिकों—की अनदेखी कर रही है। सांसद ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में असंतुलन की वजह से भारतीय उत्पादों पर विदेशों में भारी टैरिफ लगाया जा रहा है, जबकि विदेशी निवेशकों को भारत में कई रियायतें दी जा रही हैं।
सांसद का कहना है कि बजट और विदेश नीति दोनों में “राष्ट्रहित सर्वोपरि” होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि यदि बांग्लादेश में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो वहां रह रहे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष जहां सरकार से स्पष्टीकरण मांग रहा है, वहीं सत्तापक्ष इस सहायता को रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से जरूरी बता रहा है।







