दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों ने डाले हथियार, 1.19 करोड़ के इनामी शामिल

Madhya Bharat Desk
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दंतेवाड़ा।छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में दशकों से चला आ रहा माओवादी आतंक अब अपने अंतिम दौर में पहुंचता नजर आ रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की सख्त रणनीति, लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों और पुनर्वास नीतियों के प्रभाव से माओवादी संगठन के भीतर तेज़ी से टूट-फूट देखी जा रही है।

इसी क्रम में शुक्रवार को दंतेवाड़ा जिले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब कुल 63 माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में 36 ऐसे माओवादी शामिल हैं, जिन पर कुल 1 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। इनमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं।

कई राज्यों और इलाकों में थे सक्रिय

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आत्मसमर्पित माओवादी दरभा डिवीजन, दक्षिण और पश्चिम बस्तर, अबूझमाड़ क्षेत्र सहित पड़ोसी राज्य ओडिशा में भी सक्रिय रहे हैं। बीते कुछ महीनों में माओवादी संगठन को नेतृत्व स्तर पर भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जिससे कैडर का मनोबल कमजोर हुआ है।

शीर्ष नेतृत्व पर गिरे बड़े प्रहार

सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई में वरिष्ठ नेता बसव राजू और कुख्यात कमांडर हिड़मा के मारे जाने, जबकि पोलित ब्यूरो सदस्य भूपति और रुपेश के आत्मसमर्पण ने संगठन की रीढ़ तोड़ दी है। हाल ही में तेलंगाना में पीएलजीए बटालियन नंबर-1 के प्रभारी बारसे देवा के सरेंडर ने माओवादियों में भय और असमंजस की स्थिति पैदा कर दी।

इससे पहले भी सुकमा जिले में 26 इनामी माओवादियों ने हथियार छोड़े थे, जिन पर 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

पुनर्वास नीति बनी बड़ा कारण

राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति माओवादी कैडरों के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभरी है। आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक माओवादी को तत्काल 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, कृषि भूमि और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

डिविजनल और मिलिट्री कैडर भी शामिल

सरेंडर करने वालों में डिविजनल कमेटी, एरिया कमेटी और मिलिट्री कंपनी स्तर के माओवादी शामिल हैं। इनमें से सात माओवादियों पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इन पर पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर हमले, एंबुश, आईईडी ब्लास्ट और आगजनी जैसी गंभीर घटनाओं में शामिल होने के आरोप दर्ज हैं।

पुलिस का बयान

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने कहा कि ‘पूना मारगेम: पुनर्वास के माध्यम से पुनर्जीवन’ पहल से माओवाद प्रभावित इलाकों में शांति और विकास को लेकर विश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि हिंसा केवल विनाश लाती है, जबकि पुनर्वास सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित भविष्य की दिशा दिखाता है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में ही 1573 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, और यह सिलसिला 2026 में भी लगातार जारी है।

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