दंतेवाड़ा में PDS चावल घोटाले का खुलासा, 18 करोड़ का 30 हजार क्विंटल चावल सड़ा

Madhya Bharat Desk
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दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। गीदम स्थित वेयरहाउस में संग्रहित करीब 30 हजार क्विंटल चावल फफूंद और सड़न के कारण खराब हो चुका है। खराब चावल की अनुमानित कीमत लगभग 18 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। बीजापुर और सुकमा जिलों से लगातार शिकायतें मिलने के बाद कराई गई जांच में इस गंभीर लापरवाही और संभावित घोटाले का खुलासा हुआ।

जांच के दौरान गोदाम में रखे तीन बड़े स्टैक में भारी मात्रा में फफूंद और सड़न पाई गई। सूत्रों के अनुसार, खराब चावल को ठिकाने लगाने के बजाय करीब 50 से अधिक मजदूरों के माध्यम से उसे साफ कर खपाने की तैयारी की जा रही थी, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। इस बीच मामले के उजागर होते ही गोदाम प्रभारी और ब्रांच मैनेजर को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन नोटिस मिलने के तुरंत बाद दोनों के गायब हो जाने से मिलीभगत और अनियमितता की आशंका गहराती जा रही है।

बताया जा रहा है कि चावल को सुरक्षित रखने के लिए फ्यूमीगेशन पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे, इसके बावजूद चावल का इस हद तक खराब होना कई सवाल खड़े कर रहा है। अब जांच के दायरे में यह बिंदु भी शामिल है कि चावल मिल से ही खराब आया था या फिर भंडारण, गुणवत्ता जांच और निगरानी में गंभीर लापरवाही बरती गई।

इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे करोड़ों रुपये के बड़े घोटाले से जोड़ते हुए कहा कि पूरे प्रकरण में लापरवाही के साथ-साथ मिलीभगत की भी आशंका है। उन्होंने निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वहीं जिला विपणन अधिकारी (DMO) ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक गोदाम से एक भी दाना बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। प्रशासन ने पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

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