टी.एस. सिंहदेव के बयान से सियासत में हलचल: ‘मुख्यमंत्री बनने की इच्छा में कुछ गलत नहीं’ — कांग्रेस में लोकतांत्रिक महत्वाकांक्षा, भाजपा ने साधा निशाना

Madhya Bharat Desk
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छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टी.एस. सिंहदेव के ताजा बयान ने प्रदेश में नई हलचल मचा दी है। बिलासपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान सिंहदेव ने मुख्यमंत्री पद को लेकर कहा—“मैं कभी नहीं कहूंगा कि मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनना है, मुख्यमंत्री बनना कोई भी चाहेगा।” उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

सिंहदेव ने साफ किया कि उनके भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई निजी लालसा नहीं है, लेकिन किसी भी जनसेवक के लिए राज्य का नेतृत्व करना गर्व की बात होती है। उन्होंने पार्टी के फैसले को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद का निर्णय संगठन पर निर्भर करता है और वे हमेशा संगठन के फैसले का सम्मान करेंगे।

इस बयान के बाद प्रदेश कांग्रेस ने इसे एक स्वाभाविक लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति बताया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सह प्रभारी विजय जांगिड़ ने कहा कि हर जनप्रतिनिधि के मन में मुख्यमंत्री बनने की इच्छा होती है, इसमें कोई गलत बात नहीं। लेकिन इस पर अभी चर्चा करना जल्दबाजी होगी क्योंकि यह मुद्दा तीन साल बाद का है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिलहाल पार्टी का पूरा ध्यान संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों की तैयारी पर है।

दूसरी ओर, भाजपा ने इस बयान को “पुराने जख्म कुरेदने” वाला बताया। भाजपा विधायक सुनील सोनी ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस का “ढाई-ढाई साल” वाला बुखार अब तक उतरा नहीं है, जबकि अब प्रदेश में भाजपा की सरकार है। उन्होंने कहा कि सिंहदेव को अब 15-20 साल तक मुख्यमंत्री पद की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हालांकि, सोनी ने सिंहदेव की सादगी और जनसंपर्क की तारीफ भी की और कहा कि राजनीति में समय और परिस्थितियाँ बहुत कुछ बदल देती हैं।

दरअसल, वर्ष 2018 में जब कांग्रेस ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी, तब सिंहदेव का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुख दावेदारों में था। उस समय “ढाई-ढाई साल” के फॉर्मूले पर भी खूब चर्चा हुई थी, लेकिन अंत में पार्टी ने अपने फैसले को सर्वोच्च मानते हुए नेतृत्व तय किया। सिंहदेव ने भी तब पार्टी के निर्णय को स्वीकार किया था।

आज उनका यह बयान न सिर्फ कांग्रेस में लोकतांत्रिक महत्वाकांक्षा को दिखाता है बल्कि भाजपा के लिए भी राजनीतिक हमला करने का एक मौका बन गया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बयान छत्तीसगढ़ की सियासत में किस नए मोड़ की शुरुआत करता है।

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