छत्तीसगढ़ में अंबेडकर जयंती के अवसर पर समाज के उन लोगों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर समाज का नाम रोशन किया है। यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता उपेन्द्र जगत ने साझा की।
उन्होंने बताया कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश को ऐसा संविधान दिया, जिसमें हर नागरिक को समानता और अधिकारों की गारंटी मिलती है। उन्होंने विशेष रूप से संविधान में दिए गए 6 मौलिक अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये अधिकार आज भी देश की लोकतांत्रिक नींव को मजबूत बनाए हुए हैं।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ घासी/घसिया समाज के प्रदेश अध्यक्ष सचिन खरे ने बाबा साहब के प्रसिद्ध संदेश “शिक्षित बनो, संगठित रहो” को याद करते हुए कहा कि समाज की प्रगति के लिए एकजुटता और शिक्षा सबसे जरूरी है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उपेन्द्र जगत ने समाज के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि घसिया समाज का छत्तीसगढ़ से जुड़ाव काफी पुराना है। आजादी से पहले बस्तर और उड़ीसा की रियासतों में समाज के लोग घोड़ों की देखरेख और शिल्प कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। खासतौर पर पीतल और कांसे की कलाकृतियों में उनकी पहचान रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि बस्तर आर्ट को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सराहा गया है। दिल्ली, महाराष्ट्र, कोलकाता और पंजाब जैसे बड़े शहरों में इस कला को विशेष पहचान मिली है।
प्रदेश अध्यक्ष सचिन खरे ने कहा कि समाज के युवा ही बदलाव की असली ताकत हैं। आज समाज के कई लोग शिक्षा, प्रशासन, खेल, कला और राजनीति के क्षेत्र में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि समाज के प्रतिभाशाली लोगों को पद्म श्री जैसे राष्ट्रीय सम्मान भी मिल चुके हैं।
अंत में यह घोषणा की गई कि जल्द ही एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें शिक्षा, खेल, कला, राजनीति और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले समाज के लोगों को सम्मानित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में प्रदेश महामंत्री सुमित नायक, महेंद्र दीप, श्याम डोंगरे सहित समाज के कई वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।



