छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग में एक बार फिर टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग के प्रमुख अभियंता विजय कुमार भतपहरी पर आरोप है कि वे अपने चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए नियम-कानूनों को अपने हिसाब से गढ़ रहे हैं और खुली निविदा प्रक्रिया को मज़ाक बनाकर रख दिया गया है।
सूत्रों और ठेकेदारों के अनुसार, बेमेतरा, नवागढ़ और मुंगेली ज़िलों से जुड़ी भारी भरकम सड़क परियोजनाओं में पहले से तय ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए बाक़ी दावेदारों को जानबूझकर बाहर कर दिया गया। इतना ही नहीं, कई ठेकेदारों को सीधे फोन कर यह तक कहा गया कि वे टेंडर ही न डालें।
मामला निविदा क्रमांक 177198 (दिनांक 30 अक्टूबर 2025) से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित लागत 116.87 करोड़ रुपये है। आरोप है कि इस टेंडर में रायपुर कंस्ट्रक्शन को 20 प्रतिशत दर (बिलो में) पर काम दे दिया गया।
दूसरा मामला नांदघाट–मुंगेली मार्ग से संबंधित निविदा क्रमांक 177199 (दिनांक 30/10/2025) का है, जिसकी लागत 112.88 करोड़ रुपये बताई जा रही है। आरोप है कि यहां रायपुर कंस्ट्रक्शन को डिसक्वालिफाई कर दुर्ग के ठेकेदार आलोक शिवहरे को 15 प्रतिशत दर पर काम सौंप दिया गया।
विशेषज्ञों और ठेकेदारों का दावा है कि इस फैसले से सरकार को जानबूझकर करीब 5 प्रतिशत का नुकसान पहुंचाया गया। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या यह सब एक सोची-समझी बंदरबांट का हिस्सा था?
अब बड़ा सवाल यह है कि जब नियम सबके लिए समान होते हैं, तो फिर कुछ खास ठेकेदारों के लिए रास्ते क्यों आसान कर दिए गए? क्या सरकार और जांच एजेंसियां इस पूरे टेंडर घोटाले की निष्पक्ष जांच करेंगी, या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?







