रायपुर में चल रही हाई-प्रोफाइल DGP-IG कॉन्फ्रेंस लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। बैठक के पहले सत्र में विदेशी फंडिंग और उससे जुड़े संवेदनशील पहलुओं पर लंबी चर्चा हुई। अधिकारियों ने देश के भीतर हो रही संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों और बाहरी दखल पर चिंता जताई।

दूसरे सत्र में देश के नक्सल प्रभावित राज्यों ने अपनी-अपनी स्थिति का विस्तृत ब्यौरा पेश किया। छत्तीसगढ़ के डीजीपी अरुण देव गौतम ने राज्य में नक्सल मोर्चे पर मिली उपलब्धियों और बाकी चुनौतियों को रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत किया। दूसरा सत्र सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक चला।

अब कॉन्फ़्रेंस तीसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहाँ “जियो-पॉलिटिकल चुनौतियाँ” प्रमुख विषय है। इस चरण में विदेशी दखल, घुसपैठियों की बढ़ती सक्रियता और काउंटर स्ट्रैटेजी पर गहन विचार-विमर्श जारी है।
बैठक का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और NSA अजीत डोभाल जैसे देश के शीर्ष सुरक्षा नीति-निर्माता मौजूद हैं। उनकी उपस्थिति से यह साफ है कि केंद्र देश की आंतरिक सुरक्षा स्थितियों को लेकर बेहद गंभीर है।



