रायपुर एनआईटी चौपाटी को लेकर रायपुर में विवाद लगातार बढ़ रहा है। चौपाटी की दुकानें आमनाका में शिफ्ट कर दी गई हैं, लेकिन कांग्रेस इसे लेकर सरकार और प्रशासन पर हमलावर है। विपक्ष का आरोप है कि चौपाटी को अवैध बताकर जल्दबाज़ी में कार्रवाई की गई और छोटे व्यापारियों को बिना सुनवाई के हटाया गया।
कांग्रेस नेताओं ने उपमुख्यमंत्री से मुलाकात कर कहा कि नगर निगम के जिन अधिकारियों ने पहले इस चौपाटी को स्वीकृति दी, वही अधिकारी अब इसे अवैध बताकर तोड़ने में लगे हैं। कांग्रेस के अनुसार यह स्पष्ट रूप से प्रशासन की लापरवाही और राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई है। उनका कहना है कि यदि डिजाइन और अनुमति पहले ही दी गई थी, तो अचानक इसे अवैध कैसे घोषित कर दिया गया?
विपक्ष ने यह भी कहा कि एक भाजपा नेता की ज़िद के कारण छोटे दुकानदारों का हक मारा जा रहा है और जनता के पैसों की बर्बादी हो रही है। कांग्रेस का आरोप है कि नालंदा-2 परियोजना के लिए जगह खाली कराने के मकसद से व्यापारियों को हटाया गया है।
कांग्रेस ने दोहरे मापदंड का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बूढ़ापारा चौपाटी, जहाँ कई स्कूल और शिक्षण संस्थान हैं, वहां कार्रवाई नहीं की जा रही, जबकि अन्य जगहों पर तेजी से हटाने की कार्रवाई की गई है। इससे साफ है कि कुछ स्थानों पर जानबूझकर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है।
इसी के साथ गुढ़ियारी की 24 करोड़ की पानी पाइपलाइन परियोजना पर भी सवाल उठाए गए। कांग्रेस का कहना है कि पाइपलाइन बिछाने के बावजूद आज तक उसमें पानी नहीं आ रहा और यह सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला है।
कांग्रेस ने सरकार के सामने 4 प्रमुख मांगें रखी हैं—
1. चौपाटी विवाद पर उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई जाए।
2. जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
3. राजनीतिक दबाव में लिए गए निर्णयों की जांच हो।
4. भविष्य की कार्रवाइयों के लिए स्पष्ट नीति जारी की जाए।
विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर किसी भी मुद्दे पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।







