NCRB रिपोर्ट ने खोला समाजिक सुरक्षा का सच: छत्तीसगढ़ आत्महत्या में चौथे, दुर्घटनाओं में तीसरे स्थान पर; दिल्ली महिलाओं के लिए असुरक्षित, मप्र बाल अपराधों में शीर्ष पर

Madhya Bharat Desk
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नई दिल्ली। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की हालिया रिपोर्ट ने देश की सामाजिक और नागरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ आत्महत्या के मामलों में देशभर में चौथे स्थान पर है, जबकि दुर्घटनाओं से हुई मौतों में तीसरे स्थान पर दर्ज हुआ है। वहीं, दिल्ली महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित महानगर बनकर उभरी है, जबकि मध्यप्रदेश बच्चों के खिलाफ अपराधों में देशभर में शीर्ष पर है।

छत्तीसगढ़ में बढ़ रही आत्महत्या और दुर्घटनाओं की घटनाएं

रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ में आत्महत्या दर 26 प्रति लाख जनसंख्या रही, जो राष्ट्रीय औसत (12.3) से कहीं अधिक है। मानसिक तनाव, सामाजिक दबाव और आर्थिक असमानता को इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

इसके अलावा, 16,011 लोगों की दुर्घटनाओं में मौत दर्ज की गई, जिनमें अधिकतर गैर-प्राकृतिक (Non-natural) दुर्घटनाएं थीं। यह स्थिति राज्य में ट्रैफिक और औद्योगिक सुरक्षा पर भी सवाल उठाती है।

मध्यप्रदेश में बच्चों के खिलाफ अपराध सबसे ज्यादा

रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2023 में बच्चों के खिलाफ अपराधों की संख्या देश में सबसे अधिक रही। इनमें बाल यौन शोषण, अपहरण और शारीरिक हिंसा के मामले प्रमुख हैं। इसके साथ ही किशोर आत्महत्या के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो राज्य की सामाजिक संरचना और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताती है।

दिल्ली महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित

देश की राजधानी दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या सबसे अधिक रही। 2023 में कुल 13,366 मामले दर्ज किए गए, जिनमें दहेज हत्या, बलात्कार, यौन उत्पीड़न और घरेलू हिंसा प्रमुख हैं। यह आंकड़ा राष्ट्रीय राजधानी में महिला सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों की विफलता को दर्शाता है।

NCRB रिपोर्ट ने सरकारों के लिए बजाई चेतावनी की घंटी

NCRB की रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि राज्यों में सामाजिक और नागरिक सुरक्षा को लेकर अभी भी कई कमियाँ बनी हुई हैं। मानसिक स्वास्थ्य, महिलाओं की सुरक्षा और बच्चों की रक्षा जैसे क्षेत्रों में सरकारों को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट ने राज्य सरकारों और सामाजिक संगठनों के लिए चेतावनी की घंटी बजा दी है कि यदि इन मुद्दों पर तत्काल कार्यवाही नहीं की गई तो सामाजिक असंतुलन और बढ़ सकता है।

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