गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में माओवादियों के आत्मसमर्पण की लहर तेज होती जा रही है। इस बार दीपावली के मौके पर गरियाबंद जिले के उदंती एरिया कमेटी से जुड़े करीब 100 माओवादी अपने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की तैयारी कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि ये आत्मसमर्पण 20 अक्टूबर को दोपहर 12:30 बजे होगा।
यह फैसला हाल ही में महाराष्ट्र में भूपति के 61 साथियों और बस्तर में रूपेश के 210 माओवादियों द्वारा सरेंडर के बाद आया है। लगातार हो रहे इन सामूहिक आत्मसमर्पणों से छत्तीसगढ़ में शांति की एक नई उम्मीद जगी है।
माओवादी सुनील ने जारी की अपील:
माओवादी कमांडर सुनील द्वारा जारी अपील पत्र में कहा गया है कि संगठन के भीतर अब निराशा का माहौल है। पत्र में लिखा है – “पहले हमें बचना है, फिर संघर्ष आगे बढ़ा सकते हैं।”
सुनील ने माना कि सेंट्रल कमेटी समय पर सही निर्णय नहीं ले सकी, जिससे कई साथी मारे गए। इसलिए अब उदंती कमेटी ने हथियार छोड़कर नई जिंदगी शुरू करने का फैसला लिया है।
एसपी बोले – यह निर्णय शांति की दिशा में बड़ा कदम:
पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने कहा, “दीवाली के इस पावन अवसर पर माओवादियों का आत्मसमर्पण बेहद प्रतीकात्मक है। यह संदेश है कि हिंसा का कोई भविष्य नहीं। सरकार की पुनर्वास नीति-2025 के तहत सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन दिया जाएगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम अन्य नक्सल प्रभावित इलाकों (गोबरा, सीनापाली, सीतानदी) के लिए प्रेरणा बनना चाहिए।
एक लाख का इनामी माओवादी भी हुआ सरेंडर:
इधर, एक लाख रुपये के इनामी माओवादी पिलसाय कश्यप ने शनिवार को पुलिस अधीक्षक वाय अक्षय कुमार के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
पिलसाय ने बताया कि संगठन में अंदरूनी मतभेद, साथियों की मौत और सुरक्षित जीवन की चाह ने उसे समाज की मुख्यधारा में लौटने को प्रेरित किया।
सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत उसे 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।



