छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी पर लगे यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों की जांच एक विवादास्पद अधिकारी को सौंपे जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश कार्यालय प्रभारी नरेश गुप्ता ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के “सुशासन” के दावों पर तीखा प्रहार किया है।
गुप्ता ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि, “यह कैसा सुशासन है, जब खुद आरोपी अधिकारी ही जांच करेंगे?”
नेता नरेश गुप्ता का आरोप: जांच अधिकारी विवादित
नरेश गुप्ता ने आईपीएस आनंद छाबड़ा को जांच अधिकारी नियुक्त किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है।

उन्होंने कहा —
“यह न्याय का मज़ाक है कि आनंद छाबड़ा, जो खुद महादेव सट्टा घोटाले की जांच में सीबीआई के दायरे में हैं, उन्हें रतनलाल डांगी पर लगे आरोपों की जांच का जिम्मा दिया गया है। भगवान छत्तीसगढ़ पुलिस की रक्षा करें।”
गुप्ता ने कहा कि जब कोई अधिकारी खुद सवालों के घेरे में हो, तो वह किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच कैसे कर सकता है? उन्होंने मुख्यमंत्री के “सुशासन” और “दोषी पर कार्रवाई” के वादे को विरोधाभासी बताया।
साय के पुराने बयानों से तुलना पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री बनने से पहले विष्णु देव साय ने कहा था कि, “आईपीएस हो या आईएएस, दोषी पर कड़ी कार्रवाई होगी।”
लेकिन नरेश गुप्ता के मुताबिक, अब उन्हीं की सरकार विवादित अधिकारी से जांच करवा रही है, जो “निष्पक्षता पर सवाल” खड़े करता है और “लीपापोती की कोशिश” जैसा दिखता है।
सीएम साय का बयान — “किसी को नहीं बख्शा जाएगा”
मुख्यमंत्री ने फिलहाल जांच अधिकारी की नियुक्ति पर कोई सीधी टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अपने सख्त रुख को दोहराते हुए कहा —
“आईजी रतनलाल डांगी पर लगे आरोप गंभीर हैं। चाहे कोई आईएएस हो या आईपीएस, दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।”
बीजेपी के अंदर उठे इस सवाल ने प्रशासनिक गलियारों में चर्चा को तेज कर दिया है। अब सभी की नजरें इस पर हैं कि क्या मुख्यमंत्री जांच समिति में बदलाव करेंगे या नहीं।







