जयपुर में हुए एक बड़े भ्रष्टाचार खुलासे ने चिकित्सा क्षेत्र को हिला दिया है। एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) की टीम ने SMS मेडिकल कॉलेज के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष अग्रवाल को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि डॉक्टर ने एक मेडिकल सप्लायर से एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। यह रिश्वत अप्रैल–मई में हुई करीब डेढ़ करोड़ रुपये की खरीद के बिल पास कराने के नाम पर मांगी गई थी।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पूरे ऑपरेशन की सावधानीपूर्वक योजना बनाई। ट्रैप कार्रवाई के तहत जैसे ही सप्लायर डॉक्टर के घर पहुंचा और पैसे सौंपे, एसीबी टीम ने मौके पर धावा बोल दिया। डॉक्टर को वहीं पर गिरफ्तार कर लिया गया। जांच अधिकारियों ने उस समय मौके से रिश्वत की रकम भी बरामद की। कार्रवाई के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि विभाग के तहत अप्रैल और मई में बड़ी मात्रा में उपकरणों और सामग्रियों की खरीद हुई थी, जिसकी कुल कीमत लगभग डेढ़ करोड़ रुपये थी। इन्हीं भुगतानों को मंजूरी दिलाने के लिए सप्लायर से रिश्वत मांगी गई थी। एसीबी अब इन सभी खरीद प्रक्रियाओं की फाइलें खंगाल रही है ताकि पता लगाया जा सके कि यह मामला केवल एक डील से जुड़ा है या फिर कोई बड़ा रैकेट इसमें सक्रिय है।
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक वरिष्ठ पद पर बैठे डॉक्टर का इस प्रकार भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाना न केवल मरीजों का भरोसा तोड़ता है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर भी गहरा असर डालता है।
एसीबी ने डॉक्टर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया है और आगे की जांच जारी है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या विभाग में अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी इस लेन-देन में शामिल थे। यह मामला स्वास्थ्य क्षेत्र में गहराते भ्रष्टाचार को उजागर करने वाला एक अहम उदाहरण बन गया है।







