छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जिले के मैनपाट में हिमाचल प्रदेश की मशहूर जगहों शिमला और मनाली की तर्ज पर मॉल रोड बनाने की योजना पर राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। सरकार ने मॉल रोड निर्माण के लिए चिन्हित की गई जमीन से 54 परिवारों को बेदखल करने का आदेश जारी किया है। इन परिवारों पर वर्षों से सरकारी जमीन पर कब्जा होने का आरोप है। प्रशासन का कहना है कि सर्वे में इन लोगों द्वारा कब्जा किए गए क्षेत्रों की पुष्टि हुई है और अब इन्हें खाली कराया जाएगा।
हालांकि इस आदेश का कांग्रेस ने कड़ा विरोध किया है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के नेतृत्व में शुक्रवार 10 अक्टूबर को सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मैनपाट में प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि प्रशासन गरीबों को बेदखल कर रहा है जबकि प्रभावशाली लोगों को जमीन का पट्टा दे दिया गया है। कांग्रेस का कहना है कि यह कार्रवाई एकतरफा और अन्यायपूर्ण है, इसलिए वह इसका विरोध जारी रखेगी।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाई तो और बड़ा आंदोलन किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गरीब परिवार वर्षों से यहां रह रहे हैं, कुछ को तो पहले पट्टा भी दिया जा चुका था। अब उन पट्टों को रद्द कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया अमानवीय है।
दूसरी ओर प्रशासन ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इस कार्रवाई में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है। तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि सभी 54 लोगों को नोटिस देकर बेदखली की प्रक्रिया कानूनन चलाई जा रही है। जांच में यदि कोई विसंगति पाई जाती है तो उसे दूर किया जाएगा।
दरअसल, मैनपाट पूरे साल ठंडे मौसम और प्राकृतिक सुंदरता के कारण सैलानियों का आकर्षण केंद्र रहता है। पर्यटकों को और आकर्षित करने के लिए यहां मॉल रोड और झंडा पार्क जैसी परियोजनाओं की मंजूरी दी गई है। प्रशासन का मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी।
इस पूरे मामले में एक ओर विकास योजनाओं की बड़ी उम्मीदें हैं तो दूसरी ओर आम लोगों के हितों की लड़ाई भी। फिलहाल, मैनपाट में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यह मामला और भी गरमा सकता है।



