नई दिल्ली:जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बड़ा बयान दिया है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की 99.99% जनता भारत सरकार को अपनी सरकार मानती है और क्षेत्र में पिछले छह वर्षों में उल्लेखनीय विकास हुआ है।
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि राज्य का दर्जा बहाल करने के मामले में परामर्श चल रहा है और सभी पहलुओं पर विचार के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर केंद्र को चार सप्ताह का और समय दिया है ताकि वह याचिकाओं पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल कर सके।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा – “पहलगाम जैसी घटनाओं पर भी विचार जरूरी”
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने का फैसला लेने से पहले सुरक्षा और शांति से जुड़े सभी पहलुओं पर गौर करना आवश्यक है। कोर्ट ने कहा, “देखिए, पहलगाम में क्या हुआ था — ऐसे मुद्दों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।”
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए हैं और अब क्षेत्र में एक निर्वाचित सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कुछ आतंकी घटनाओं के बावजूद क्षेत्र में विकास और स्थिरता बनी हुई है।
2023 में केंद्र के वचन की याद दिलाई गई
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को याद दिलाया कि दिसंबर 2023 में दिए गए फैसले में केंद्र सरकार ने राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखते हुए केंद्र को निर्देश दिया था कि सितंबर 2024 तक विधानसभा चुनाव कराए जाएं और राज्य का दर्जा जल्द बहाल किया जाए।
केंद्र ने कहा – “विकास हो रहा है, लेकिन स्थिति जटिल है”
तुषार मेहता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति विशेष और संवेदनशील है। उन्होंने कहा, “हमारा वचन गंभीर है, लेकिन अंतिम निर्णय से पहले कई पहलुओं पर विचार जरूरी है। कुछ लोग गलत नैरेटिव फैला रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि जम्मू-कश्मीर की 99.99% जनता केंद्र सरकार के साथ है और वहां विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं।”



