लूट या लापरवाही? जल जीवन मिशन में 370 करोड़ बेकार; मंत्री-अफसर गठजोड़ के कारण जनता प्यासी, काम रुका

Madhya Bharat Desk
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘जल जीवन मिशन’ को छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार का दीमक खा रहा है, और इस पूरी अव्यवस्था में विभाग के अफसर की मनमानी और संबंधित मंत्री की संदेहास्पद चुप्पी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों के लिए शुद्ध पानी का सपना अफसरों की लूट और राजनीतिक अनदेखी के कारण ठप हो गया है।

मंत्री के चहेते अफसर का ‘खेल’: चहेते ठेकेदारों को 65 करोड़ का ‘तोहफा’

सूत्रों के अनुसार, ‘जल जीवन मिशन’ के तहत जारी राशि के दुरुपयोग में विभाग के अफसर (शीर्ष अधिकारी) की सीधी भूमिका सामने आ रही है।

  • छोटे ठेकेदारों का भुगतान रोका: जिन छोटी एजेंसियों ने गाँव-गाँव में काम शुरू किया था, उनका भुगतान जानबूझकर रोक दिया गया है, जिससे काम पूरी तरह ठप हो गया है।
  •  बड़े ठेकेदारों को लाभ: इसके विपरीत, करीब 60 से 65 करोड़ रुपये की राशि बड़े और चहेते ठेकेदारों को आनन-फानन में भुगतान करने की तैयारी चल रही है। यह सब मंत्री के चहेते अफसर के दबाव में हो रहा है, जिसका सीधा मतलब है कि जनता के पैसों का इस्तेमाल सत्ता के करीबी लोगों की जेब भरने के लिए किया जा रहा है।
  • अफसरशाही की मनमानी: प्रमोशन के बाद नवनियुक्त अफसरों का समूह मनमानी कर रहा है और जनहित को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। 370 करोड़ की राशि पहले ही बेकार साबित हो चुकी है, और अब यह नया बंदरबांट चल रहा है।

मंत्री की चुप्पी पर गंभीर सवाल: आखिर क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?

इतने बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार, काम ठप होने और करोड़ों रुपये के दुरुपयोग की खबरों के बावजूद संबंधित मंत्री की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है:

  • क्या मंत्री को जानकारी नहीं है?— अगर मिशन में 65 करोड़ का ‘खेल’ हो रहा है, तो क्या मंत्री इससे अनजान हैं, या जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं?
  • अफसरों को संरक्षण?— विभाग का अफसर खुलेआम मनमानी कर रहा है, लेकिन मंत्री द्वारा कोई कार्रवाई या जांच का आदेश क्यों नहीं दिया गया?
  • जनता की प्यास से बेपरवाह?— लाखों ग्रामीण शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं, पाइपलाइन अधूरी पड़ी हैं—क्या मंत्री को ग्रामीण हित की कोई चिंता नहीं है?

मंत्री की यह चुप्पी साफ संकेत देती है कि या तो उन्हें अपने विभाग पर नियंत्रण नहीं है, या फिर भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति नहीं है।

ड्रीम प्रोजेक्ट बन गया ‘घोटाला प्रोजेक्ट’

छत्तीसगढ़ में ‘जल जीवन मिशन’ अब ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ नहीं, बल्कि ‘घोटाला प्रोजेक्ट’ बनता जा रहा है। एक तरफ मंत्री के चहेते अफसर जनता के पैसों की लूट में व्यस्त है, वहीं दूसरी तरफ मंत्री चुप्पी साधे बैठे हैं। इसका सीधा नुकसान राज्य की प्यासी जनता को हो रहा है।

सरकार को तुरंत एक्शन लेते हुए न सिर्फ मंत्री के चहेते अफसर पर कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि मंत्री को भी इस गंभीर लापरवाही का जवाब देना होगा।

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