अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आर्थिक नीतियाँ हमेशा चर्चा का विषय रही हैं। विशेष रूप से उनकी टैरिफ नीति ने न केवल अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर असर डाला, बल्कि वैश्विक बाजारों को भी प्रभावित किया। उनके दूसरे कार्यकाल के दौरान टैरिफ लागू करने का निर्णय एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है।
मुख्य विषय:
ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार विदेशी वस्तुओं पर टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। इसका सीधा असर अमेरिका के शेयर बाजार पर पड़ा। लोगों को डर लगने लगा कि इससे विदेशी वस्तुएं महंगी हो जाएंगी और व्यवसाय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। नतीजतन, निवेशकों ने घबराकर अपने शेयर तेजी से बेचना शुरू कर दिए। इससे डाउ जोंस, S&P और नैस्डैक जैसे प्रमुख मार्केट इंडेक्स में केवल दो दिनों में 10% से अधिक की गिरावट देखी गई।
कोरोना काल की तुलना:
अमेरिकी शेयर बाजार में ऐसी गिरावट पिछली बार मार्च 2020 में कोरोना महामारी के दौरान देखने को मिली थी। उस समय भी बड़ी-बड़ी टेक कंपनियों के शेयर टूट गए थे और ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों में घबराहट फैल गई थी। उस स्थिति को देखते हुए ट्रम्प सरकार ने टैरिफ को 90 दिनों के लिए टाल दिया था।
वर्तमान स्थिति:
अब ट्रम्प ने फिर से 9 अगस्त से दुनियाभर के देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे फिर से अमेरिकी बाजार में अस्थिरता आ सकती है और अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है। इसके चलते वैश्विक मंदी की आशंका भी बढ़ गई है।







