स्वास्थ्य विभाग के दौरे के बीच सीजीएमएससी में बड़ा घोटाला उजागर, आवश्यक दवाएं गायब
रायपुर: स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के बस्तर दौरे के दौरान सरकारी संस्था छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जगदलपुर और दंतेवाड़ा के वेयरहाउसों के निरीक्षण में मलेरिया किट और रेबीज वैक्सीन जैसी जीवन रक्षक दवाओं की चौंकाने वाली कमी सामने आई है। जहां जगदलपुर वेयरहाउस में इन दोनों की उपलब्धता शून्य है, वहीं दंतेवाड़ा में रेबीज वैक्सीन की मात्र 10 डोज ही मौजूद हैं।
यह चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ है जब खुद स्वास्थ्य मंत्री अपने विभाग की टीम के साथ राज्य के स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति का जायजा ले रहे हैं। दवाओं की इस गंभीर कमी का कारण एक बड़े वित्तीय घोटाले से जुड़ा है, जिसके तार पूर्व सीजीएमएससी एमडी पद्मिनी भोई और कथित तौर पर मंत्री जायसवाल से जुड़े हैं।

सूत्रों के मुताबिक, पद्मिनी भोई ने मंत्री की सहमति से कई अन्य दवा कंपनियों के लंबित भुगतानों को रोककर, रीएजेंट घोटाले के मुख्य आरोपी मोक्षित कॉर्पोरेशन को करीब 52 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया। इस बड़े भुगतान ने सीजीएमएससी के दवा खरीद बजट को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया। परिणामस्वरूप, जिन दवा कंपनियों को उनका बकाया नहीं मिला, उन्होंने आवश्यक और जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति रोक दी।
इस लापरवाही का सीधा असर प्रदेश के अस्पतालों पर पड़ा है, जहां आज मलेरिया, रेबीज और कोविड जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए जरूरी दवाएं और टेस्ट किट उपलब्ध नहीं हैं। आलोचकों का कहना है कि यह घटना सीजीएमएससी के गठन के मूल उद्देश्य को ही विफल करती है।
हालांकि, अस्पतालों के पास सीएमएचओ के माध्यम से स्थानीय स्तर पर दवाएं खरीदने का विकल्प मौजूद है, लेकिन इस प्रक्रिया में भी मनमाने दामों पर खरीद से भ्रष्टाचार की अलग कहानी सामने आती है।



