नई दिल्ली।बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर संसद के मानसून सत्र में लगातार विवाद और हंगामा देखा जा रहा है। इस मुद्दे पर गतिरोध खत्म करने की दिशा में विपक्ष ने चुनाव सुधारों पर चर्चा की पहल की है, जिसे उन्होंने “मध्यम मार्ग” करार दिया है।
हालांकि केंद्र सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार की ओर से सहमति मिलने की संभावना फिलहाल कम है।
विपक्ष का आरोप:
विपक्ष का कहना है कि बिहार में चल रहे SIR की आड़ में वोटरों की संख्या में छंटनी कर सरकार चुनावी लाभ लेने की कोशिश कर रही है। इसी कारण विपक्ष संसद में इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहा है।
सरकार का पक्ष:
संसद कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि जिन मामलों की सुनवाई अदालत में लंबित है और जो संस्थाएं संवैधानिक रूप से स्वतंत्र हैं (जैसे चुनाव आयोग), उनके कार्यों पर संसद में बहस नहीं की जा सकती।
जयराम रमेश और गौरव गोगोई का पलटवार:
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि संसद में पहले भी कई बार चुनाव आयोग और चुनाव सुधारों पर चर्चा हो चुकी है। उन्होंने गौरव गोगोई के उस ट्वीट का भी जिक्र किया जिसमें 1961, 1981 और 2019 में चुनाव सुधारों पर संसद में हुई चर्चाओं के उदाहरण दिए गए हैं।
गोगोई ने सरकार से अपील की कि वह इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति दे ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत किया जा सके।
क्या है बिहार SIR विवाद?
विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के अंतर्गत बिहार में मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसका मकसद कुछ वर्गों के मतदाताओं को सूची से बाहर करना है।



