रायपुर। उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों से एक बड़ी अपील सामने आई है। यहां के ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने सांसदों को चिट्ठी लिखकर विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को वोट न देने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब सुदर्शन रेड्डी सुप्रीम कोर्ट में जज थे, तब उन्होंने सलवा जुडुम बंद करने का फैसला सुनाया था। इस निर्णय से प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों का मानना है कि उस फैसले ने नक्सलियों को ताकत दी और आम किसानों व आदिवासियों को असुरक्षा के हालात में छोड़ दिया।

सलवा जुडुम बंद करने के फैसले पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि सलवा जुडुम नक्सल प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों के लिए सुरक्षा कवच की तरह था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हजारों लोग नक्सल हिंसा की चपेट में आ गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उस निर्णय ने नक्सलियों का हौसला बढ़ाया और आम जनता को अपने हाल पर छोड़ दिया।
सांसदों से की सीधी अपील
ग्रामीणों और संगठनों ने अपने पत्र में लिखा कि सांसदों को इस बार वोट देते समय यह जरूर सोचना चाहिए कि जिस व्यक्ति ने उनके जीवन को असुरक्षित बनाया, उसे इतनी बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी कैसे सौंपी जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर सांसद जनता की भावनाओं का सम्मान करते हैं, तो उन्हें सुदर्शन रेड्डी का विरोध करना चाहिए।
चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
इस अपील के सामने आने के बाद उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है। माना जा रहा है कि ग्रामीणों की यह चिट्ठी चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकती है।







