कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने हाल ही में अपने एक बयान से राजनीतिक माहौल गरमा दिया। उन्होंने कहा कि वह जन्म से कांग्रेसी हैं और जीवन के अंत तक कांग्रेस पार्टी के साथ ही रहेंगे। शिवकुमार ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने कभी भाजपा की “टांग खींचने” की कोशिश जरूर की, लेकिन स्वयं भाजपा का हिस्सा बनने की उनकी न कभी इच्छा थी और न ही भविष्य में होगी।
विधानसभा में शिवकुमार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की वंदना भी गाई थी, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम उनके राजनीतिक विचारधारा से जुड़ा नहीं था, बल्कि परिस्थितियों के कारण उठाया गया था। उन्होंने बार-बार दोहराया कि कांग्रेस पार्टी ही उनका राजनीतिक और वैचारिक घर है।
कांग्रेस नेता शिवकुमार का यह बयान उस समय आया है जब कर्नाटक की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच वर्चस्व की जंग जारी है। भाजपा लगातार यह आरोप लगाती रही है कि कई कांग्रेसी नेता अवसर मिलने पर भाजपा से नजदीकी बना लेते हैं। वहीं, शिवकुमार ने अपने इस बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि वह कांग्रेस के सच्चे और समर्पित सिपाही हैं।
यह विवाद इस बात को भी उजागर करता है कि भारतीय राजनीति में विचारधारा और व्यवहारिक राजनीति के बीच अक्सर टकराव देखने को मिलता है। नेताओं को कई बार परिस्थितियों के कारण ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं, जिन पर बाद में सवाल उठते हैं। लेकिन शिवकुमार ने साफ कर दिया है कि उनके लिए कांग्रेस पार्टी से बड़ा कोई विकल्प नहीं है।



