कानून और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन लोकतंत्र की नींव है। जब इन्हीं नियमों की अवहेलना सरकारी तंत्र के भीतर से होने लगे, तब न केवल शासन की छवि धूमिल होती है, बल्कि आम जनता का भरोसा भी टूटता है। कोरबा में सामने आया अधिग्रहित भूमि की अवैध रजिस्ट्री का मामला इसी तरह की प्रशासनिक अनियमितताओं का बड़ा उदाहरण है।
घटना का विवरण:
1 अगस्त 2025 को कोरबा से सामने आए इस मामले में अधिग्रहित भूमि की बिक्री के बाद भी रजिस्ट्री की अनुमति दी गई। यह मामला ग्राम रतलिया का है, जहाँ एसईसीएल के लिए कोयला खदान हेतु जमीन अधिग्रहित की गई थी। अधिग्रहण के बाद वहाँ की जमीन की खरीद-बिक्री पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध था, लेकिन उप पंजीयक ने टुकड़े कर भूमि की बिक्री की अनुमति दे दी।
कलेक्टर ने इस मामले पर त्वरित संज्ञान लेते हुए उप पंजीयक को नोटिस भेजा और 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। जवाब नहीं मिलने या असंतोषजनक उत्तर मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
मामले की गंभीरता:
यह सिर्फ एक कानूनी उल्लंघन नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की विश्वसनीयता पर सवाल है। अधिग्रहित भूमि की बिक्री न केवल अवैध है, बल्कि इससे भविष्य में भूमि स्वामित्व को लेकर विवाद और कानूनी उलझनें भी पैदा हो सकती हैं। यदि ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई न की जाए, तो अन्य जिलों में भी ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।







