छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक दर्दनाक घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की सच्चाई को उजागर कर दिया। पाइल्स से परेशान एक मरीज इलाज के लिए एक झोलाछाप डॉक्टर के पास पहुंचा। इलाज के नाम पर डॉक्टर ने मरीज के प्राइवेट पार्ट में एक साथ नौ इंजेक्शन लगा दिए। इंजेक्शन लगने के बाद मरीज का पेट फूलने लगा, तेज ब्लीडिंग और गंभीर इंफेक्शन शुरू हो गया। हालत इतनी बिगड़ गई कि समय पर उचित इलाज न मिलने से उसकी जान चली गई।
यह घटना इलाके में सनसनी फैलाने वाली रही। स्थानीय लोगों ने झोलाछाप डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग की। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की तथा आरोपी डॉक्टर को पकड़कर उसके क्लिनिक को सील कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इंजेक्शन लगाने की गलत तकनीक और अस्वच्छ उपकरणों ने मरीज की स्थिति को और बिगाड़ दिया।
यह दुखद घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों का इलाज कितना खतरनाक हो सकता है। जनता को जागरूक करने और स्वास्थ्य विभाग को ऐसे फर्जी क्लीनिकों पर कड़ी कार्रवाई करने की तत्काल जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



