छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में धर्मांतरण और महिला तस्करी के आरोपों ने बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। दुर्ग रेलवे स्टेशन से दो नन और एक युवक को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर तीन आदिवासी युवतियों को उत्तर प्रदेश के आगरा ले जाकर कन्वर्जन कराने का आरोप है। इस घटना के बाद राज्य में राजनीतिक संग्राम शुरू हो गया है और देश की राजधानी दिल्ली तक इसका असर पहुंच चुका है।
बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने युवतियों के साथ दो नन और एक युवक को पकड़ा। उनका आरोप था कि युवतियों को बहला-फुसलाकर ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के उद्देश्य से उन्हें आगरा ले जाया जा रहा था। इस घटना के बाद जीआरपी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों को हिरासत में लिया और युवतियों को सखी सेंटर भेजा गया। पुलिस ने आरोपियों पर धर्मांतरण और मानव तस्करी की धाराओं में मामला दर्ज किया है।
इस मामले में गिरफ्तार की गई दोनों नन केरल की रहने वाली हैं और ग्रीन गार्डन्स नामक मिशनरी समूह से जुड़ी हैं। दिल्ली में इस गिरफ्तारी के खिलाफ विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ननों की रिहाई की मांग की है। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी, वेणुगोपाल समेत कई नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
बजरंग दल का कहना है कि यह सुनियोजित धर्मांतरण का प्रयास था। दुर्ग जिला संयोजक रवि निगम ने दावा किया कि यह घटना मिशनरी संगठनों द्वारा किए जा रहे व्यापक कन्वर्जन नेटवर्क का हिस्सा है। वहीं, ईसाई मिशनरी से जुड़े एम जोराथन जॉन ने आरोपों को झूठा बताया और कहा कि राजनीतिक दबाव में यह कार्रवाई हुई है।
जीआरपी थाना प्रभारी राजकुमार बोरझा के मुताबिक, युवतियों के बयानों के आधार पर कार्यवाही की गई है। थाना भिलाई में BNS की धारा 143 और छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा 4 के तहत केस दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह मामला धर्मांतरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग दोनों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि दो नन नारायणपुर की युवतियों को नौकरी का लालच देकर आगरा ले जा रही थीं। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर भी राजनीति करती है। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई अलोकतांत्रिक और पूर्वनियोजित थी। उन्होंने निष्पक्ष जांच और ननों की रिहाई की मांग की है।
यह मामला केवल कानूनी ही नहीं, सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद सच क्या सामने आता है — धर्मांतरण की कोशिश या फिर एक राजनीतिक प्रोपेगैंडा।



